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रानी पुलिस की सफलता: पुलिसकर्मी बनकर बुजुर्गो को लिफ्ट के बहाने लूटपाट करने वाली दिल्ली की गैंग का पर्दाफाश

वृद्ध महिलाओं को लिफ्ट देकर बिठाकर उनके साथ पुलिसकर्मी बनकर लूटपाट करने वाली अन्तर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश, दिनांक 14.05.2024 को अपराह्न रानी थाना क्षेत्र में नाडोल व सोमेसर में हुई घटना का पर्दाफाश 

  • रानी 

हनुमान सिंह राव
रिपोर्टर

हनुमान सिंह राव, रिपोर्टर - बीजापुर

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> रानी पुलिस थाना टीम को मिली सफलता
> घटना में प्रयुक्त होंडा सिटी कार जब्त
> घटना में संलिप्त सभी 3 आरोपी गिरफ्तार जिनसे की जा रही है विस्तृत पूछताछ
> राजस्थान सहित उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश में लगभग 40 वारदात करना कबूला 


केस नंबर – एक 

पाली एसपी चूनाराम जाट ने बताया कि दिनांक 14.05.2024 को अपरान्ह प्रार्थी मूलचंद पुत्र रावतिंग निवासी बोरड़ी पुलिस थाना रानी ने थाने पर उपस्थित होकर एक रिपोर्ट पेश की कि मैं और मेरी पत्नी चिकित्सकीय प्रयोजन से पाली जाने के लिए नाडोल बस स्टैण्ड पर बस
का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने हमारे पास आकर हमारे गन्तव्य के बारे में पूछा तो उनके द्वारा भी पाली जाना कहकर अपनी कार में बिठा दिया। हम दोनों कार में पीछे बैठे थे और पीछे वह लड़का भी बैठ गया।

कार में चालक व एक अन्य व्यक्ति आगे बैठे थे। नाडोल से रवाना होने पर कुछ ही दूरी पर चलकर उन्होंने अपने आप को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि आगे नाकाबंदी चल रही है, कोई लूट हुई है। आप अपना गहना उतारकर इस लिफाफे में डाल दो, अन्यथा पुलिस युही सवाल जवाब करेगी। जैसे ही हमने हमारे गहने लिफाफे में डाले तो हमारे पास बैठे व्यक्ति ने दूसरा लिफाफा पकड़ा दिया। देवली के पास जाकर हमें कहा कि हमें वापस जाना है तुम दोनों यहाँ पर उतर जाओ। हमने थोड़ी देर बार चैक किया तो लिफाफे में मोबाईल के चार्जर व वायर मिला। इस प्रकार हमारे गहने व दागीनें चोरी कर ले गये। इस रिपोर्ट पर प्रकरण संख्या 110/2024 पुलिस थाना रानी दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ किया।

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केस नंबर – दो

इसी प्रकार श्रीमती कृष्णादेवी पत्नी पुखसिंह निवासी पीलोवनी पुलिस थाना खिंवाड़ा ने थाना रानी पर उपस्थित होकर रिपोर्ट पेश की कि वह दिनांक 14.05.2024 को 11.30 बजे सोमेसर पर पाली जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनके पास आकर पूछकर उसके गन्तव्य जानकर पाली तक अपनी कार में छोड़ने हेतु कहकर कार में बिठाया। गाड़ी में बैठने पर कार में बैठे
व्यक्तियों द्वारा स्वयं को पुलिस वाले बताये और चोरों को पकड़ने व आगे नाकाबंदी होने की बात बताई और डराया व कहा कि पुलिस परेशान करेगी अन्यथा अपने गहने लिफाफे में डाल दो। प्रार्थीनी द्वारा गहने लिफाफे में डाले तो उन्होंने प्रार्थीनी से लेकर लिफाफा सील कर दिया और चकमा देकर दूसरा लिफाफा पकड़ा दिया। ग्राम टेवाली पुलिस थाना गुड़ा एंदला पहुंचने पर उन्होंने चौकी में जाकर अन्य
लड़के से पूछताछ करने की आवश्यकता बताकर उसे नीचे उतार दिया। घर पहुंचने पर लिफाफा चैक किया तो लूट का शिकार होने की जानकारी हुई। इस रिपोर्ट पर पुलिस थाना रानी पर प्रकरण संख्या 111 / 2024 पुलिस थाना रानी दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ किया गया।

पुलिस द्वारा तात्कालिक कार्यवाही

घटना प्रकाश में आते ही थानाधिकारी पुलिस थाना रानी द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए नाडोल व सोमेसर स्थित केमरों को चैक करवाया तो घटना में कार संख्या आरजे 06 सीएफ 7504 की संलिप्तता प्रकाश में आई। सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से संदिग्धों को फोटो प्राप्त किए। सम्पूर्ण जिले में कार के स्वामी की जानकारी प्राप्त कर तत्काल चितोड़गढ पुलिस के माध्यम से पंजीकृत स्वामी से
पूछताछ की गई तो पाया वह कार उसी का पास है तथा घटना से कोई लेना देना नहीं है। अतः इस जानकारी पर पुन: दूसरी दिशा में अनुसंधान प्रारम्भ किया।

टीमों का गठन

गम्भीरता देखते हुए पुलिस अधीक्षक, जिला पाली द्वारा चेनसिंह महेचा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बाली जिला बाली व राजेश यादव, वृताधिकारी, वृत बाली जिला पाली के निर्देशन में संलिप्त अपराधियों को पकड़ने हेतु पन्ना राम, थानाधिकारी रानी के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया जिसमें रानी थाने के अलावा  गौतम आचार्य हैड कानि. व जगाराम हैड कानि., कार्यालय पुलिस अधीक्षक, पाली को टीम में शामिल किया। टीम में शामिल प्रत्येक सदस्य को पारम्परिक एवं गैर पारम्परिक तरीकों से साक्ष्य संकलन कर मुलजिमों की दस्तयाबी के निर्देश दिए। टीम द्वारा विभिन्न स्थानों से कार नं. के आधार पर सीसीटीवी फुटेज प्राप्त कर संदिग्धों द्वारा अपनाए गए रूट की जानकारी प्राप्त की गई। रूट से संबंधित स्थानों पर मुखबीर मामूर कर पारम्परिक एवं गैर पारम्परिक तरीकों से साक्ष्य संकलित किए गए।

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वारदात में इस्तमाल की जाने वाली कार

संदिग्धों की दस्तयाबी अर्जित सफलता

पुलिस टीम द्वारा प्राप्त विभिन्न स्रोतों से जानकारी के आधार पर कुछ संदिग्धों की गतिविधियों संदिग्ध पाई गई जिन पर लगातार 10 दिनों तक निगरानी रखी गई। दिनांक 07.06.2024 को संदिग्धों को दस्तयाब करने बाबत टीम को उत्तर प्रदेश व दिल्ली के लिए रवाना किया गया। टीम द्वारा संदिग्धों को कन्नौज के तीर्वा कस्बे के एक होटल से तीनों संदिग्धों को दस्तयाब कर प्रारम्भिक पूछताछ कर संलिप्तता के तथ्य प्रकाश में आने पर तीनों को उनके द्वारा दोनों वारदातों में प्रयुक्त कार सहित थाना रानी लाकर गहन पूछताछ प्रारम्भ की गई।
पूछताछ के दौरान संदिग्धों ने दोनों वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया। जुर्म स्वीकारोक्ति तथा साक्ष्यों की सुसंगतता के आधार पर नियमानुसार गिरफ्तार किया गया। अभियुक्तों से गहन अनुसंधान किया जा रहा है तथा उनसे लूटे गये माल की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे है।

दस्तयाबसुदा मुलजिमों का विवरण

1. इसरार उर्फ वसीम पुत्र भूरे खान उम्र 35 साल निवासी 34 / 385 पुलिस थाना त्रिलोकपुरी, दिल्ली
2. अंकित पुत्र सुरेश निवासी 21/17, उम्र 30 साल, पुलिस थाना त्रिलोकपुरी, दिल्ली
3. नाजिम पुत्र बुद्धन उम्र 26 साल निवासी बुरावली, पुलिस थाना रेरा, जिला अमरोहा हाल 4/470 पुलिस थाना कल्याणपुरी, दिल्ली

अभियुक्तों द्वारा अन्य घटनाओं की स्वीकारोक्ति पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने जिला सीकर, टोंक, बूंदी, चितौड़गढ़, अजमेर, उदयपुर, राजसमन्द, भीलवाड़ा, दौसा, सवाईमाधोपुर, चुरू, अलवर, भरतपुर, ब्यावर आदि जिलों व झांसी, होसंगाबाद मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के कई जिलों की लगभग 40 वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। संबंधित थानों, व जिलों के पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में सूचित किया गया है।

गैंग का तरीका वारदात

यह गैंग वृद्ध महिलाओं व पुरूषों को टारगेट करती है ताकि घटना के शिकार होने की जानकारी होने तक वे लोग घटना का क्षेत्र छोड़ सकें। सर्वप्रथम जिस क्षेत्र में घटना कारित की जाना हो, उस क्षेत्र में घटना में प्रयुक्त की जाने वाली कार की हूबहू किसी अन्य कार की नम्बर प्लेट बनवाकर अपनी कार में लगाते है ताकि गाड़ी नम्बर पता करने पर पुलिस कार के वास्तविक स्वामी तक ही पहुंच पाए।
तत्पश्चात किसी स्थान के व्यस्ततम मार्ग पर अन्य वाहन का इंतजार कर रहे वृद्ध व्यक्तियों के पास पहुंचकर उनका गंतव्य जानकर स्वयं को भी उसी गंतव्य तक जाना बताते है और उन्हें लिफ्ट देकर बिठा देते है।

गाड़ी में बिठाकर स्वयं को पुलिसकर्मी बताकर गाड़ी में ही रखे एक मोबाईल फोन से पुलिस की नाकाबंदी तोड़ने एवं रूकवाने, मुलजिम पकड़ने के संबंधित आवाज को सुनाते है, उसके पश्चात् सवारी को सलाह दी जाती है कि आप भी अपने गहने, पैसे निकाल कर लिफाफे में डाल दो अन्यथा पुलिस आपको परेशान करेगी। पीड़ित के भयभीत होने एवं लिफाफे मे डालने पर हस्ताक्षर करने के बहाने अपने साथी को लिफाफा देकर चालाकी से अन्य लिफाफा पकड़ा देते है जिसमें वायर, चार्जर व अन्य हल्की वस्तुए डाली हुई होती है।

लिफाफा एक्सचेंज करने पर एक अन्य रिकॉर्डिंग सुनाई जाती है कि हमने मुलजिमों को पकड़ा है, जिनसे भी पूछताछ करनी है, इनको थाने लेकर आ रहे है। इस रिकॉर्डिंग से पीड़ित और ज्यादा भयभीत हो जाते है और उसे नीचे उतार देते है। ध्यान विचलित करने के लिए स्वयं बदमाश गाड़ी मोड़कर विपरित दिशा में कुछ दूरी तक जाने के बाद पुनः पहली दिशा में भाग जाते है ताकि पुलिस भी संलिप्त वाहन की तलाश गलत दिशा में करती रहे और वे पुलिस की गिरफ्त में नही आ सके।

बदमाशों ने पूछताछ के दौरान बताया कि इन दिनों में उत्तरप्रदेश के अयोध्या नगर में ऐसी लूट की वारदातों को अंजाम देने की तैयारियाँ कर ली थी परन्तु इससे पहले पुलिस ने पकड़ लिया।


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