पाली में जैन साधु की मौत: हादसा या हत्या?

क्या यह एक साधारण सड़क दुर्घटना थी या सुनियोजित हत्या? जैन समाज की ओर से उठ रहे गंभीर सवाल
28 मई 2025, यह तारीख जैन समाज के लिए एक गहरे आघात और आक्रोश का कारण बनी। राजस्थान के पाली जिले में विहाररत जैन साधु पंडरिक रत्न सूरी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। प्रारंभिक रूप से इसे एक ‘दुर्घटना’ बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे विवरण सामने आए, यह घटना एक गहरे और भयानक षड्यंत्र की ओर इशारा करने लगी।
इस घटना ने न केवल एक साधु की जान ली, बल्कि पूरे जैन समाज को झकझोर कर रख दिया। सच्चाई क्या है? क्यों यह एक सामान्य दुर्घटना नहीं लगती? और अब समाज क्या मांग कर रहा है?
घटना का विवरण
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स्थान: पाली, राजस्थान
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तारीख: 28 मई 2025
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पीड़ित: जैन साधु पंडरिक रत्न सूरी
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परिस्थिति: विहार करते समय ट्रक की टक्कर से मृत्यु
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साक्षी: 10+ अन्य साधु जो साथ में विहार कर रहे थे
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, साधु शांतिपूर्वक कच्चे रास्ते से विहार कर रहे थे। तभी एक भारी ट्रक, जो मुख्य सड़क पर चल रहा था, जानबूझकर अपना मार्ग बदलते हुए कच्चे रास्ते पर गया, साधु को जोरदार टक्कर मारी और फिर मुख्य सड़क पर चढ़कर फरार हो गया।
क्यों इसे ‘हत्या’ माना जा रहा है?
1. चालक का व्यवहार संदिग्ध था
यदि यह एक दुर्घटना होती, तो:
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ट्रक को भारी क्षति होती
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चालक को चोटें आतीं
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वाहन नियंत्रण से बाहर हो सकता था
लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ट्रक चालक ने न केवल स्पष्ट रूप से अपना रास्ता बदला, बल्कि बिना किसी बाधा के वापस मुख्य सड़क पर लौट गया। यह इंगित करता है कि उसे पहले से पता था कि क्या करना है।
2. प्रत्यक्षदर्शियों का बयान
साथ चल रहे साधुओं ने बताया कि यह जानबूझकर किया गया टक्कर हमला था, जिसमें किसी तरह की घबराहट या गलती नहीं दिखी। सब कुछ ठंडे दिमाग से किया गया।
3. पिछली घटनाएं भी मिलती-जुलती
यह घटना कोई पहली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में जैन साधुओं की ‘दुर्घटनाओं’ में मौत की कई घटनाएं हुई हैं — जिनमें कार्यप्रणाली लगभग एक जैसी थी:
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भारी वाहन
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तेज रफ्तार
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ट्रक द्वारा टक्कर
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घटनास्थल से फरार हो जाना

किस तरह का षड्यंत्र हो सकता है?
लक्षित हत्याएं
इस तरह की घटनाएं किसी संगठित समूह द्वारा की जा सकती हैं जो जैन धर्म या साधु जीवन के विरुद्ध काम कर रहा है।
आर्थिक प्रलोभन की बात
स्थानीय सूत्रों और अफवाहों के अनुसार, साधु भगवंतों को मारने के लिए 2 लाख से 5 लाख रुपए तक दिए जाते हैं। यह एक गहरी और खतरनाक साजिश को दर्शाता है।
धार्मिक विद्वेष फैलाना
संभावना है कि यह कार्य समाज में भय और विद्वेष फैलाने के उद्देश्य से किया गया हो, ताकि साधुओं का सार्वजनिक विहार रोका जा सके।
जैन समाज की न्याय की मांग
समाज की ओर से अब कई अहम मांगें रखी गई हैं:
1. हत्या का केस दर्ज किया जाए
भारतीय न्याय संहिता की धारा 101 के अंतर्गत हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
2. आपराधिक षड्यंत्र की जांच हो
धारा 61(2) और 106(2) के तहत भी मामला दर्ज हो।
3. SIT गठित की जाए
एक विशेष जांच दल (SIT) बनाया जाए जो इस हत्या की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और तकनीकी जांच करे।
4. साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं
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घटनास्थल के CCTV
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टोल प्लाज़ा रिकॉर्ड
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फास्टैग डेटा
इन सभी को जब्त करके फॉरेंसिक जांच हो।
5. प्रत्यक्षदर्शियों को सुरक्षा मिले
साथ चल रहे साधुओं के बयान दर्ज कर उन्हें सुरक्षा दी जाए।
6. घृणित संगठनों की पहचान और कार्रवाई
ऐसे संगठन जो साधुओं और जैन धर्म के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं, उनकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
समाज का आक्रोश
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सोशल मीडिया पर विरोध की लहर
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शांति मार्च, कैंडल मार्च, ज्ञापन
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साधुओं की सुरक्षा की मांग
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पूरे देश में जैन समाज एकजुट
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं है। यह एक विचार की हत्या है। यह एक शांतिपूर्ण धर्म, उसकी साधु परंपरा, और एक समर्पित जीवन पद्धति पर हमला है।
अगर अब भी इसे सिर्फ ‘एक और दुर्घटना’ मानकर नजरअंदाज किया गया, तो यह आने वाले समय में और भी गंभीर परिणाम ला सकता है।












