पुस्तक समीक्षा: ‘वेश्या की बेटी’ – सामाजिक यथार्थ को छूती कहानियों का अनमोल संग्रह

एक परिचय: सोचने को मजबूर करती 25 प्रभावशाली कहानियों का संग्रह
‘वेश्या की बेटी’ एक ऐसा कहानी संग्रह है जो पाठकों को भावनाओं, संवेदनाओं और सामाजिक वास्तविकताओं के गहरे समुद्र में ले जाता है। कुल 25 कहानियों वाला यह संग्रह हर पन्ने के साथ पाठकों को न केवल बांधे रखता है बल्कि उन्हें सोचने और आत्मविश्लेषण करने पर मजबूर करता है।
इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी सादगी भरी भाषा, प्रवाहमयी शैली और गहरी सामाजिक पकड़। प्रत्येक कहानी की अपनी विविध पृष्ठभूमि है, जो भारत के आम जनजीवन और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई है।
🔷 भाषा शैली और पाठक अनुभव
इस संग्रह की कहानियां सरल भाषा में लिखी गई हैं, जिससे एक सामान्य पाठक भी आसानी से हर भाव और विचार को समझ सकता है। हर पात्र, हर दृश्य, हर परिस्थिति, अपने आसपास की लगती है – मानो ये कहानियां हमारे ही जीवन का हिस्सा हों।
पाठक जब एक कहानी खत्म करता है तो अगली को पढ़ने की जिज्ञासा और उत्सुकता स्वतः ही जन्म लेती है। यहीं इस पुस्तक की सबसे बड़ी साहित्यिक सफलता छिपी है।
🔷 कहानी की खासियत: सामाजिक सोच और संवेदनाओं का संगम
🟢 ‘मुर्दाघर’ और ‘एंबुलेंस’ – कोरोना त्रासदी की मार्मिक दस्तावेज़ी
कोरोना महामारी के समय की मानवीय त्रासदी को लेखक ने बहुत संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ पेश किया है।
मुर्दाघर कहानी में एक बेटा अपनी मां के शव के लिए जिस ममत्व और साहस को दिखाता है, वह आंखें नम कर देता है।
एंबुलेंस कहानी भी कोरोना काल की पीड़ा, लाचारी और प्रेम की गहराई को छूती है।

🟢 ‘वेश्या की बेटी’ – नारकीय जीवन से मुक्ति की प्रेरक गाथा
संग्रह की शीर्षक कहानी ‘वेश्या की बेटी’, न केवल एक मां की पीड़ा, बल्कि उसकी संघर्षशील इच्छाशक्ति और अपनी बेटी को बेहतर भविष्य देने की जिद को दर्शाती है।
कहानी बताती है कि स्त्री कोई भोग्या नहीं, बल्कि वह शिक्षा, आत्मबल और इच्छाशक्ति से समाज की सोच को चुनौती देने वाली शक्ति है।
बेटी का शिक्षा को हथियार बनाना, आज की लड़कियों को भी प्रेरणा देता है।
🟢 ‘काली’ – पशु और मानव के बीच रिश्तों की मार्मिक प्रस्तुति
‘काली’, एक ऐसी गाय की कहानी है जो इंसानों से गहरे भावनात्मक रिश्ते बनाती है।
यह कहानी मानवीय रिश्तों को नए आयाम देती है और दिखाती है कि प्यार और अपनापन सिर्फ मनुष्य-मनुष्य के बीच ही नहीं, बल्कि पशुओं से भी संभव है।
काली के साथ परिवार और समाज का भावनात्मक जुड़ाव, इस कहानी को अलग ऊंचाई देता है।
🟢 ‘सुमेधा की जिद’ – सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी
‘सुमेधा की जिद’ सामाजिक विसंगतियों, भेदभाव और स्त्री सशक्तिकरण की मजबूत अभिव्यक्ति है।
कहानी दिखाती है कि कैसे एक लड़की अपनी जिद और आत्मबल से समाज के बने-बनाए ढांचे को चुनौती देती है।
यह कहानी समाज की नई दिशा की तरफ बढ़ते कदमों की मिसाल है।
🔷 लेखक की दृष्टि और पत्रकारिता की छाप
इस कहानी संग्रह के लेखक पत्रकारिता से जुड़े हैं, जिसकी छाया उनकी लेखनी में साफ दिखती है।
विषयों का चयन, गहराई से शोध, और घटनाओं का यथार्थ चित्रण उनकी पत्रकारिता पृष्ठभूमि को उजागर करता है।
कहानियों में कहीं भी दुरूहता या अतिरंजना नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई है।
🔷 प्रस्तावना और प्रकाशन विवरण
इस संग्रह की प्रस्तावना प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने लिखी है, जो इस पुस्तक को विश्वसनीयता और गरिमा प्रदान करती है।
पुस्तक को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रकाशक ‘न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन’ ने प्रकाशित किया है।
कवर पेज आकर्षक है, और यह किताब Amazon पर भी उपलब्ध है।
📌 मुख्य विशेषताएं संक्षेप में
- कुल 25 कहानियां, प्रत्येक में अलग सामाजिक विषय
- सरल भाषा, भावनात्मक प्रवाह
- यथार्थपरक लेखन, पाठक को जोड़ने की क्षमता
- सामाजिक कुरीतियों, विषमताओं और परिवर्तन की कहानियां
- पत्रकारिता अनुभव से भरपूर शोधित विषय
- प्रस्तावना: पंकज त्रिपाठी द्वारा
- प्रकाशित: न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली
- उपलब्धता: Amazon पर ऑनलाइन उपलब्ध
हर पाठक के लिए आवश्यक पठनीय संग्रह
‘वेश्या की बेटी’ सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि हमारे समाज की कई अनकही कहानियों की आवाज है। यह संग्रह वर्तमान सामाजिक संदर्भों, मानवीय मूल्यों और महिलाओं के संघर्ष को शानदार ढंग से प्रस्तुत करता है।
हर कहानी दिल को छूने वाली, सोच को झकझोरने वाली और प्रेरणा देने वाली है। यह किताब हर आयु वर्ग, विशेष रूप से युवाओं और शिक्षकों को जरूर पढ़नी चाहिए। यह संग्रह साहित्य प्रेमियों के संग्रह में एक अनिवार्य पुस्तक बनती है।













