पोयणा में बिजली का खंभा बना मूकदर्शक,नियम दीवार में दफन, निजी मकान में चुनवा दिया विद्युत पोल, हादसे का खतरा मंडराया

ग्रामीणों की शिकायत पर हरकत में आया विभाग, लीला भारती को नोटिस जारी
सुमेरपुर। निकटवर्ती पोयणा गांव में बिजली व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जहां नियमों को ताक पर रखकर एक निजी मकान की दीवार में ही विद्युत खंभा चुनवा दिया गया। वर्षों तक यह खंभा प्रशासन और विद्युत विभाग की आंखों के सामने मूकदर्शक बना रहा, लेकिन किसी ने सुध लेने की जरूरत नहीं समझी। आखिरकार ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद मामला उजागर हुआ और विद्युत विभाग को हरकत में आना पड़ा।
दीवार में दफन किया बिजली खंभा*सुरक्षा मानकों की अनदेखी
ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित मकान मालिक लीला भारती द्वारा पूर्व से स्थापित विद्युत पोल को अपने निर्माणाधीन मकान की दीवार में चुनवा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इसी दीवार के ऊपर-नीचे आवासीय कमरे और बाथरूम बने हुए हैं। यह स्थिति न केवल विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह से पोल को दीवार में दबा देना विद्युत तंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक है। करंट लीकेज, शॉर्ट सर्किट या पोल गिरने की स्थिति में जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
ग्रामीणों की शिकायत,तब टूटी विभाग की नींद
लंबे समय तक यह अतिक्रमण कैसे चलता रहा,यह सवाल अब गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों की लिखित शिकायत और समाचार पत्रों में मामला सामने आने के बाद विद्युत विभाग ने मौके की जांच कराई। मौका निरीक्षण में पाया गया कि विद्युत पोल वास्तव में मकान की दीवार में चुनवाया गया है और लाइन से छेड़छाड़ भी की गई है। इसके बाद विभाग ने लीला भारती को नोटिस जारी कर सात दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
नोटिस में सख्त निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी
विद्युत विभाग द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्यक्ति कार्यालय में उपस्थित होकर विद्युत तंत्र को हुई क्षति की भरपाई करे, उपयुक्त स्थान पर नया विद्युत पोल लगवाए तथा अपनी दीवार हटाकर विद्युत लाइन को नियमानुसार स्थानांतरित कराए। यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं की गई, तो विद्युत अधिनियम 2003 की संबंधित धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम विकास अधिकारी से भी मांगी रिपोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक अभियंता द्वारा ग्राम पंचायत बामनेरा के ग्राम विकास अधिकारी को भी पत्र भेजा गया है। पत्र में मकान प्लॉट की सीमा-ज्ञान सहित वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अतिक्रमण किस सीमा तक किया गया है और आगे नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी को भी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय अनदेखी या मिलीभगत?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों तक यह अवैध निर्माण कैसे चलता रहा। क्या विद्युत विभाग की नियमित जांच नहीं होती, या फिर किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई? ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो यह स्थिति ही नहीं बनती।
ग्रामीणों की मांग—केवल नोटिस नहीं, ठोस कार्रवाई हो ग्रामीणों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। जब तक मौके से पोल हटाकर सुरक्षित स्थान पर स्थापित नहीं किया जाता और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक खतरा बना रहेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विद्युत विभाग वास्तव में सख्त कदम उठाता है या मामला फाइलों में दबकर रह जाता है।











