मीरा-भायंदर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की लापरवाही से मासूम ग्रन्थ मुथा की दर्दनाक मौत

- भायंदर (मुंबई)
मारवाड़ी जैन परिवार के चिराग ने ली अंतिम साँस
मीरा-भायंदर के गोपीनाथ मुंडे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एक हृदय विदारक हादसे में 11 वर्षीय बालक ग्रन्थ हंसमुख मुथा की स्विमिंग पूल में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। ग्रन्थ, एक मारवाड़ी जैन परिवार से था और गर्मियों की छुट्टियों में चल रहे समर कैंप के अंतर्गत तैराकी सीखने आया था। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को शोक में डुबो दिया है।

लापरवाही बनी मौत की वजह
जानकारी के अनुसार, यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मीरा-भायंदर महानगरपालिका के अधीन आता है, लेकिन इसे निजी कॉन्ट्रैक्टर्स को संचालन हेतु सौंपा गया है। कॉम्प्लेक्स में टेबल टेनिस, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और स्विमिंग जैसी कई खेल गतिविधियाँ संचालित होती हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के समय स्विमिंग पूल पर मौजूद लाइफगार्ड की लापरवाही से यह हादसा हुआ।
हादसे के समय ग्रन्थ पूल में अभ्यास कर रहा था और अचानक डूब गया। समय रहते उसे बचाने की कोशिश नहीं की गई, जिससे उसकी जान चली गई।
परिवार और समाज में शोक की लहर
ग्रन्थ के पिता, हंसमुख मुथा, कल्याण मित्र मंडल के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब तक इस घटना की निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं दी जाती, तब तक वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
यह खबर सुनकर पूरे मारवाड़ी समाज और मीरा-भायंदर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। हजारों की संख्या में लोग स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के बाहर एकत्रित हुए और प्रशासन से न्याय की मांग की।

राजनीतिक प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता ने घटनास्थल पर पहुंचकर शोक व्यक्त किया और पुलिस प्रशासन से CCTV फुटेज की जाँच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कठोर कदम उठाए जाएँ। पूर्व विधायक गीता जैन ने भी परिवार से मिलकर संवेदना प्रकट की और निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
कॉम्प्लेक्स का इतिहास और वर्तमान स्थिति
यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शरद पवार की सरकार के दौरान स्थापित हुआ था, जब गिलबर्ट सेठ मीरा-भायंदर के विधायक थे। आज यह परिसर गोल्डन नेस्ट जैसे घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है और यहाँ रोजाना हजारों लोग खेल गतिविधियों के लिए आते हैं।
लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है – क्या बच्चों की सुरक्षा के प्रति हमारा सिस्टम इतना असंवेदनशील हो चुका है?
इस दर्दनाक घटना ने एक मासूम की जान ले ली और एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया। यह समय है आत्मचिंतन करने का — क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने में असफल हो रहे हैं? प्रशासन और नागरिकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।














