रमजान खुद के प्रति समर्पण का महीना है – शहजाद अंसारी

रमजान खुद के प्रति समर्पण का महीना है
— शहजाद अंसारी
टुण्डी | लूनिया टाइम्स डेस्क
टुण्डी : रमज़ान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। यह आत्म-संयम, इबादत, दान और आत्मचिंतन का समय है। इस संबंध में शहजाद अंसारी ने कहा कि रमज़ान खुदा के प्रति समर्पण और आत्म-शुद्धि का संदेश देता है।
उन्होंने बताया कि इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। रोज़े का उद्देश्य अल्लाह के प्रति समर्पण के साथ गरीबों के प्रति हमदर्दी विकसित करना है। यह महीना कुरान शरीफ के अवतरण से भी जुड़ा हुआ है और आध्यात्मिक सुधार का विशेष अवसर प्रदान करता है।
रोज़े के दौरान मुसलमान खाने-पीने, धूम्रपान, शराब तथा अन्य शारीरिक इच्छाओं से परहेज करते हैं। साथ ही झूठ बोलना, चुगली करना और गुस्सा करना जैसे व्यवहारों से बचने की भी सीख दी जाती है। इस अवधि में नमाज़, कुरान पाठ और दान-पुण्य पर विशेष जोर रहता है।

रमज़ान के दौरान 20 रकात की तरावीह नमाज़ पढ़ी जाती है, जिसे दो-दो रकात के समूह में अदा किया जाता है। टुण्डी की विभिन्न मस्जिदों में ईशा की नमाज़ के बाद हाफिज कुरान सुनाते हुए तरावीह पढ़ा रहे हैं।
ज़कात, जो कुल संपत्ति का 2.5 प्रतिशत होता है, हिजरी साल पूरा होने पर देना अनिवार्य है। हालांकि अधिक सवाब की नीयत से लोग रमज़ान में भी ज़कात अदा करते हैं। वहीं सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले देना आवश्यक होता है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार टुण्डी के विभिन्न घरों में आज पहला रोज़ा खोला गया। सहरी का अंतिम समय सुबह करीब पांच बजे तक रहा, जबकि इफ्तार शाम लगभग पौने छह बजे शुरू हुआ। मौसम सुहाना रहने से इस बार कई नन्हे रोजेदार भी उत्साह के साथ रोज़ा रखते नजर आए।
रमज़ान सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मा को अनुशासित कर अल्लाह के करीब आने का पवित्र अवसर है।














