
राजस्थानी मायड़ भाषा आज भी संवैधानिक मान्यता से वंचित
आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज


जोधपुर/पाटवी। विश्व मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) के अवसर पर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति जिला पाटवी, जोधपुर से जुड़े कवि एवं लोक कला मर्मज्ञ देवी सिंह देवल चारण (कूपडावास) ने केंद्र और राज्य सरकार से मायड़ भाषा राजस्थानी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है।
आजादी के बाद से जारी है मांग
देवल चारण ने कहा कि देश आजाद होने के बाद से ही राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग उठती रही है, लेकिन अब तक यह सपना साकार नहीं हो पाया है, जो राजस्थानियों के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि मायड़ मातृभाषा वह भाषा होती है, जो बच्चा अपनी मां से सीखता है। त्रिभाषा सूत्र के अनुसार व्यक्ति के समग्र विकास के लिए मातृभाषा के साथ हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान भी आवश्यक है।
प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में जरूरी
देवल चारण ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को बाल्यावस्था में मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि बच्चा तेजी से और बेहतर तरीके से सीख सके।
उन्होंने कहा कि राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता नहीं मिलने के कारण आज स्कूलों में यह भाषा पढ़ाई नहीं जा रही है, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और जड़ों से दूर होती जा रही है।
कक्षा 1 से 10 तक विषय बनाने की मांग
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि कक्षा 1 से 10 तक राजकीय एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में राजस्थानी मायड़ भाषा को एक विषय के रूप में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाए, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा से जुड़े रहें।
देवल चारण ने चिंता जताई कि लंबे समय से उपेक्षा के कारण राजस्थानी ग्रंथ और साहित्य धूल खा रहे हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भाषा और संस्कृति दोनों को नुकसान होगा।
बोलियां अलग, भाषा एक
उन्होंने स्पष्ट किया कि मेवाड़ी, मारवाड़ी, मालवी, हाड़ौती और ढूंढाड़ी अलग-अलग बोलियां हैं, लेकिन मूल भाषा राजस्थानी ही है। बोलियों को अलग भाषा नहीं समझना चाहिए।
देवल चारण ने भारत सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मायड़ भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा राज्य सरकार से इसे द्वितीय राजभाषा घोषित करने की मांग की है।
देवल ने समाज से अपील की कि घरों और सामाजिक समारोहों में राजस्थानी मायड़ भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए, ताकि नई पीढ़ी में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और जुड़ाव बना रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को पत्र लिखकर भी मांग दोहराई है कि ठोस कदम उठाए जाएं, तभी राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति सुरक्षित रह सकेगी।











