राजस्थान में विकास बनाम हकीकत: खिंवादी गांव की बदहाल कहानी

विकास के दावों की पोल खुली: खिंवादी बना कीचड़ का गांव

- रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर
राजस्थान में विकास बनाम हकीकत
खिंवादी की बदहाली ने खोली सरकारी तंत्र की परतें
सुमेरपुर | पाली (राजस्थान)
राजस्थान में विकास के दावे जितने बड़े हैं, ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत उतनी ही कड़वी होती जा रही है।
पाली जिले के सुमेरपुर उपखंड का ग्राम खिंवादी इस सच्चाई की पहली मिसाल बनकर सामने आया है।
यहां अधूरी सड़कें, जाम नालियां, जलभराव और गंदगी ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं।
यह रिपोर्ट उस राज्य स्तरीय ग्रामीण बदहाली श्रृंखला की पहली कड़ी है, जो यह सवाल उठाती है —
क्या राजस्थान का विकास सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
खिंवादी में सड़क और नाली निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है।
पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गलियों में कीचड़, सड़कों पर जलभराव और चारों ओर फैली गंदगी ग्रामीणों की मजबूरी बन चुकी है।
नालियां या तो आधी बनी हैं या पूरी तरह जाम हैं,
जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है।
नाली चौक: जहां बदहाली सबसे ज्यादा
गांव का नाली चौक क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है।
यहां गंदगी और पानी के कारण बच्चों का निकलना मुश्किल, बुजुर्गों का चलना दूभर और महिलाओं को रोज़ाना भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति एक-दो महीने की नहीं, बल्कि वर्षों से बनी हुई है।
5 साल से शिकायतें, समाधान शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले पाँच वर्षों से लगातार शिकायतें कर रहे हैं,
लेकिन न तो ग्राम पंचायत ने स्थायी समाधान किया,
न ही उच्च स्तर से कोई ठोस कार्रवाई हुई। हर बार आश्वासन मिले, मगर जमीनी हालात जस के तस बने रहे।
भेदभाव के आरोप, जिम्मेदार मौन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ हिस्सों में
दिखावटी विकास कर दिया गया, जबकि खिंवादी क्षेत्र को जानबूझकर उपेक्षित रखा गया।

सबसे गंभीर बात यह है कि ग्राम पंचायत प्रशासक
और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले पर
चुप्पी साधे हुए हैं।
गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है,
बीमारियों का खतरा बना हुआ है और स्वच्छता से जुड़ी सरकारी योजनाओं की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन से सीधे सवाल
- जिन कार्यों को पूरा बताया गया, वे जमीन पर अधूरे क्यों हैं?
- निरीक्षण और सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी थी?
- क्या लापरवाही के लिए जवाबदेही तय होगी?
यह रिपोर्ट किसी एक गांव की कहानी नहीं,
बल्कि राजस्थान के सैकड़ों गांवों की आवाज़ है —
जहां विकास कागजों में आगे बढ़ा,
लेकिन जनता की ज़िंदगी वहीं अटकी रह गई।













