सिरोही में भ्रष्टाचार के आरोप में पोसालिया ग्राम पंचायत की प्रशासक निलंबित

- रिपोर्ट पत्रकार पुखराज कुमावत सुमेरपुर
सिरोही में बड़ा एक्शन: भ्रष्टाचार के आरोप में पोसालिया ग्राम पंचायत की प्रशासक निलंबित
सिरोही। जिले की पोसालिया ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले में पंचायती राज विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सरपंच प्रशासक रेखा कंवर को निलंबित कर दिया है। व्यवसायिक भवन का आवासीय पट्टा जारी कर 10 लाख रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। निलंबन आदेश विभाग के अतिरिक्त आयुक्त त्रिलोक चन्द मीणा द्वारा जारी किए गए हैं।

शिकायत से जांच तक, फिर निलंबन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रकरण की शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को सौंपी गई। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल, राजस्व अभिलेखों का मिलान तथा पट्टा निर्गमन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया वित्तीय गड़बड़ी और प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आने पर विभाग ने त्वरित प्रभाव से निलंबन आदेश जारी कर दिए।
आरोपों का विवरण
- व्यवसायिक भवन को आवासीय श्रेणी में दर्शाकर पट्टा जारी करना।
- नियमानुसार वाणिज्यिक दरों के स्थान पर आवासीय दर लागू करना।
- सरकारी राजस्व को 10 लाख रुपये से अधिक की हानि पहुंचाना।
- स्वीकृति एवं दस्तावेजी प्रक्रिया में नियमों के विपरीत अनियमितता।
सूत्रों के अनुसार, यदि संबंधित भवन का पट्टा वाणिज्यिक श्रेणी में जारी किया जाता तो पंचायत को कहीं अधिक राजस्व प्राप्त होता। आवासीय श्रेणी में पट्टा जारी करने से सरकारी खजाने को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा।
विभाग का सख्त संदेश
अतिरिक्त आयुक्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आने के कारण निलंबन आवश्यक पाया गया। विभाग ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई, वित्तीय वसूली और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिले में हलचल, फाइलों की समीक्षा शुरू
इस कार्रवाई के बाद सिरोही जिले के पंचायत राज तंत्र में हड़कंप की स्थिति है। विभिन्न पंचायतों में पूर्व में जारी पट्टों और भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़ी फाइलों की भी समीक्षा किए जाने की चर्चा है। प्रशासनिक हलकों में इसे “जीरो टॉलरेंस नीति” के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की संभावित कार्रवाई
विभागीय जांच की आगामी प्रक्रिया में वित्तीय क्षति की वसूली, संबंधित अधिकारियों की भूमिका तय करना तथा संभावित आपराधिक प्रकरण दर्ज करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
सिरोही में हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि राजस्व से खिलवाड़ और नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।













