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सुखी संतुष्ट जीवन जीने की कला हैं योग | प्रणव योग केंद्र का तृतीय वार्षिक समारोह भायंदर में आयोजित

जेठमल राठौड़
रिपोर्टर

जेठमल राठौड़, रिपोर्टर - मुंबई / बाली 

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सुखी संतुष्ट जीवन जीने की कला हैं योग

प्रणव योग केंद्र का कार्यक्रम

भायंदर :- योग एक पूर्ण जीवनशैली है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने में मदद करती है। यह एक प्राचीन भारतीय पद्धति है जो हमें स्वस्थ, सुखी और संतुष्ट जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है। योग का अभ्यास नियमित रूप से करें और इसके लाभों का आनंद लें।

उपरोक्त विचार योग गुरु व प्रणव योग केंद्र चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष विष्णु शर्मा ने व्यक्त किये।मीरारोड में ट्रस्ट के तृतीय वार्षिक समारोह में सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि योग से शरीर को लवचीलापन, शक्ति और संतुलन मिलता है। यह रक्तचाप को नियंत्रित करता है, पाचन तंत्र को मजबूत करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।शर्मा ने कहा कि योग एक प्राचीन भारतीय पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने में मदद करती है। यह एक पूर्ण जीवनशैली है जो हमें स्वस्थ, सुखी और संतुष्ट जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।शर्मा ने कहा कि योग का अभ्यास नियमित रूप से करें, कम से कम 30 मिनट प्रतिदिनकरें व योगा योग शिक्षक से ही सीखें।जीवन में हर व्यक्ति को योग को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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विशेष अतिथि

कार्यक्रम में डॉ. रामकुमार शर्मा,डॉ. गार्गी शाह ,चित्रा हेगड़े बैंगलोर अर्नब नंदी कोलकाता, डॉ पूनम कोर पूना अरुणाजी पूना सोनल व्यास इंदौर कामिनी राठौर अहमदाबाद दिवाकर जोशी गोवा से विशेष पधारे थे।

इस अवसर पर ट्रस्टी चंद्रहास पालन, सुजाता पालन,राजकुमार शर्मा आदि गणमान्य उपस्थित थे।कार्यक्रम मे शिक्षकों व मेघावी छात्रों को सम्मानित किया गया।इस सम्मेलन का उद्देश्य एक दूसरे से मिलना और योग के प्रति कैसे जागरूकता बढ़ाये इस पर चर्चा करना था।

© Luniya Times | Health & Yoga News

न्यूज़ डेस्क

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