अपने देवता समान नेता को खोने का मलाल टुण्डी के विभिन्न आदिवासियों टोलों में छाईं मायूसी लोगों ने उनकी याद में किया मौन धारण

- टुण्डी
- अपने देवता समान नेता को खोने का मलाल टुण्डी के विभिन्न आदिवासियों टोलों में देखा गया लोगों में छाईं मायूसी।
बताते चलें कि झामुमो के संस्थापक सह अध्यक्ष दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद बेहतर इलाज के लिए सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया गया था जहां आज़ उन्होंने 9:30 बजे सुबह अंतिम सांस ली और उनका निधन हो गया जब इसकी खबर उनके कर्मभूमि टुण्डी के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में हुआ़ तो लोग अचानक तनाव के शिकार हो गए एवं अपने लोकप्रिय नेता को खोने का गहरा सदमा लगा ।
आज़ सोमवार जब इसकी सूचना जाताखूंटी पंचायत के लोगों को हुआ़ तो सिद्ध कान्हू सामाजिक शैक्षणिक सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष फेलेन सोरेन के नेतृत्व में आदिवासी भाई बहनें सिद्धू कान्हू चौक पर जमा हुए और अपने लोकप्रिय गरीबों के मसीहा दिशोम गुरु शिबू सोरेन की असामायिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण किया गया। समिति के सचिव शक्ति हेंब्रम ने उपस्थित जनसमूहों को कहा कि आज़ एक युग का अंत हो गया एवं हमलोगों ने झारखंड के लाल को हमेशा के लिए को दिया जो इसकी भरपाई कभी नहीं हो सकता।

आज़ झारखंड ही नहीं पूरे देश ने देवतातुल्य राजनेता को खोया हैं। आदिवासी के हित के बारे में सोचने वाला एकमात्र नेता हमलोगों को छोड़कर चला गया जो कभी पूरा नहीं हो सकता। अपने लोकप्रिय नेता की याद में समिति के सभी सदस्यों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण किया एवं अश्रुपूरित नेत्रों से विदाई दी।
मौके पर सिद्धू कान्हू सामाजिक शैक्षणिक सांस्कृतिक समिति जाताखूंटी अध्यक्ष फेलेन सोरेन, उपाध्यक्ष दिनेश मुर्मू,रंजीत सोरेन, प्रेम हांसदा, सचिव सह मुखिया प्रतिनिधि शक्ति हेंब्रम, संयुक्त सचिव हेमेशवर टुडू, कृष्णादेव हेंब्रम, कोषाध्यक्ष सामिल कुमार हेंब्रम,मिहिलाल हेंब्रम, संगठन मंत्री दिनेश हेंब्रम,प्रभू हेंब्रम,नरेश हेंब्रम,जाताखूंटी ग्राम प्रधान शिवलाल हेंब्रम, समिति सदस्य बेसर हेंब्रम, हरिलाल हेंब्रम, दिनेश हेंब्रम,नुनुराम टुडू,श्रीचांद टुडू,बियिंग टुडू, दर्वेश्वर हेंब्रम ,सोनुलाल हेंब्रम,साथ ही पंचायत सचिवालय में रोज़गार सेवक शशिभूषण, स्वयंसेवक सुरेश मुर्मू,बी एल ई कृष्णानंद सिंह समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के भाई बहनें उपस्थित थे।















