संयम सुवर्ण वर्ष में जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश बाली नगर में उमड़ा जनसैलाब, सर्वविरति सुवर्ण महोत्सव का भव्य शुभारंभ

बाली। जैन समाज के लिए गौरव और श्रद्धा का अद्भुत क्षण उस समय साकार हुआ जब जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब (राजुमाराज) के संयम जीवन के पंचासवें वर्ष में बाली नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। यह अवसर संयम सुवर्ण वर्ष के रूप में पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।
बाली नगर के कुलदीपक, माता चंपाबाई एवं पिता छगनराजजी चोपड़ा परिवार के सुपुत्र, जैन हिंदी साहित्य दिवाकर, प्रभावक प्रवचनकार पूज्य आचार्य भगवंत श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज के सम्मान में श्री ओसवाल मूर्ति पूजक तपागच्छ जैन संघ, बाली की ओर से सर्वविरति सुवर्ण महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया।
प्रताप चौक से निकली ऐतिहासिक श्रुत सम्मान यात्रा
सुबह 9:30 बजे प्रताप चौक से भव्यातिभव्य स्वागत यात्रा एवं मंगल प्रवेश के साथ श्रुत सम्मान यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा में शासन ध्वजा, गुरु भगवंतों की तस्वीरों से सजे रथ, ढोल-नगाड़े, शहनाई वादक, सांडेराव का भैरव बैंड, नासिक ढोल, ऊँटों पर शाही नगाड़े और शासन ध्वजा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
पूज्य जैनाचार्य द्वारा आलोकित 263 पुस्तकों की भव्य प्रदर्शनी की दो गाड़ियां ज्ञान वैभव का संदेश दे रही थीं। विभिन्न स्थानों से आई नृत्य मंडलियां, सांडेराव की कथक नृत्य मंडली और हजारों गुरु भक्तों की सहभागिता ने यात्रा को ऐतिहासिक बना दिया।

श्रद्धा का अनुपम दृश्य
हजारों माताएं-बहनें लाल रंग की साड़ियां पहनकर सिर पर कलश धारण किए कतारबद्ध चलती नजर आईं। जगह-जगह रंगोलियों से स्वागत किया गया और मंडल की बहनों ने कलश से गुरु भगवंतों की परिक्रमा कर भावपूर्ण स्वागत किया। चारों ओर भक्ति, उल्लास और आनंद का वातावरण व्याप्त रहा।
श्रुत सम्मान यात्रा प्रताप चौक से विमलपुरा, मनमोहन पार्श्वनाथ चौक, बाजार, निमड़ा वाली स्कूल, नयापुरा की गलियों से होती हुई वेरा चौक के रास्ते न्याति नोहरे में संपन्न हुई, जहां धर्मसभा में परिवर्तन हुआ।
धर्मसभा में गूंजे जयकारे
धर्मसभा का शुभारंभ विश्वविख्यात अनिल गेमावत ने मधुर संगीत और भक्ति स्वर के साथ मनमोहन पार्श्वनाथ व गुरु भगवंतों के जयकारों से किया। उन्होंने श्री ओसवाल मूर्ति पूजक तपागच्छ जैन संघ के अध्यक्ष बाबुभाई मंडलेसा से 108 सेसली पार्श्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार की भांति श्री बोयाजी तीर्थ के जीर्णोद्धार का निवेदन किया। मंच पर पहुंचकर बाबुभाई मंडलेसा ने गुरु भगवंतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सभा को सज्जनजी रांका ने अपने भावपूर्ण मनोगत से संबोधित किया, वहीं गुरु भगवंत स्थूलभद्र विजयजी के प्रवचन ने उपस्थित जनसमूह को धर्म और संयम के मार्ग पर प्रेरित किया। देश-विदेश से पधारे हजारों गुरु भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
पंचाहिक महोत्सव का भव्य कार्यक्रम क्रम
- 27/01/2026: मंगल प्रवेश, श्रुत सम्मान यात्रा, शोभायात्रा, मांगलिक प्रवचन
- 28/01/2026: त्याग वंदना, रत्न कुक्षी सम्मान, रात्रि भक्ति
- 29/01/2026: मीठी आराधना भवन में शक्रस्तव अभिषेक, मेहंदी, सांझी, महापूजा, कुमारपाल राजा आरती, लाभार्थी बहुमान
- 30/01/2026: गुरु गुण सौरभ, धर्मनाथ भगवान ध्वजारोहण, पूज्य श्री के जीवन पर आधारित नाटिका
- 31/01/2026: वंदे गुरुवर संदेश, भव्य संगीत संध्या
व्यवस्था में जुटे युवा
इस महा महोत्सव की सम्पूर्ण व्यवस्था महावीर जैन नवयुवक मंडल संस्थान के अध्यक्ष नरेन्द्रजी परमार, सचिव विक्रम राठौड़, बाली जैन मित्र मंडल मुंबई के अध्यक्ष किरणजी कितावत, सचिव चंपकजी राठौड़ एवं मंडल के समस्त कार्यकर्ताओं द्वारा संभाली जा रही है।
बाली नगर में यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि संयम, त्याग और जैन संस्कृति की जीवंत मिसाल के रूप में इतिहास में दर्ज हो गया।
















