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हमीरगढ़ उपखंड में बड़ा मामला: सरकारी स्कूल का खेल मैदान निजी कंपनी को लीज पर, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

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ब्रेकिंग न्यूज़ | भीलवाड़ा

  • भीलवाड़ा | लूनिया टाइम्स न्यूज | रिपोर्ट: नरेंद्र कुमार रेगर

भीलवाड़ा जिले के हमीरगढ़ उपखंड क्षेत्र से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। ग्राम औजयाडा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का वर्षों पुराना खेल मैदान अब निजी कंपनी को लीज पर दे दिया गया है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय का यह खेल मैदान लंबे समय से छात्र-छात्राओं द्वारा खेलकूद एवं शारीरिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लिया जा रहा था। लेकिन अब इसे एनर्जी/इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक निजी कंपनी को लीज पर दे दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस लीज के बदले प्रति वर्ष लगभग ₹1,07,000 की राशि राजस्व विभाग में जमा करवाई जा रही है।

बच्चों के अधिकारों से समझौता?

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रशासन एवं राजस्व विभाग की मिलीभगत से यह निर्णय लिया गया है। खेल मैदान छीने जाने से बच्चों को खेलने की मूलभूत सुविधा से वंचित कर दिया गया है, जिसका सीधा असर उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर पड़ेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में पहले से ही संसाधनों की कमी है, ऐसे में खेल मैदान जैसी जरूरी सुविधा को निजी हाथों में सौंपना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

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उठ रहे हैं गंभीर सवाल

  • मामले को लेकर कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं—

👉 क्या सरकारी विद्यालय की भूमि को इस तरह निजी कंपनी को लीज पर देना नियमों के तहत सही है?
👉 क्या बच्चों की शिक्षा और खेल सुविधाओं से अधिक जरूरी राजस्व वसूली है?
👉 इस निर्णय में शिक्षा विभाग और प्रशासन की क्या भूमिका रही?


ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

  • आज इस मामले को लेकर हमीरगढ़ उपखंड कार्यालय पर ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से—

रामेश्वर अहीर, कैलाश चंद्र तेली, डालचंद दादू पंथी, नारायण जी जाट, दयाराम रेगर, माधु गाडरी, जगदीश रेगर, भगवान रेगर, गोपाल अहीर, कमलेश अहीर, राजू नाथ योगी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही खेल मैदान को विद्यालय को वापस नहीं सौंपा गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन और प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगे।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

फिलहाल इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देता है या राजस्व को।

न्यूज़ डेस्क

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