कैट और ग्रोमा के प्रतिनिधियों ने व्यापारियों और किसानों की व्यथा बयां करने के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात पर जताई चिंता

- मुंबई
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने भी कृषि मंत्री से तुरंत आवश्यक कदम उठाने किया था आग्रह
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया गत 23 अगस्त को कैट की ओर से शंकर ठक्कर और ग्रोमा की ओर से अध्यक्ष भीमजी भानुशाली एवं उपाध्यक्ष अमृत जैन कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं दिल्ली चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल को मिलकर पीली मटर की शुल्क मुक्त आयात से भारत के किसानों एवं व्यापारियों को हो रहे नुकसान के बारे में अवगत कराया था एवं ज्ञापन सोपा था तभी मंत्री जी ने उचित कार्रवाई करने का भरोसा जताया था एवं प्रवीण खंडेलवाल जी ने मंत्री जी से तुरंत उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया था जिस पर संज्ञान लेते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात पर चिंता जताई और चौहान ने शिपमेंट पर 50% शुल्क लगाने की मांग की है।
खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी को हाल ही में लिखे एक पत्र में, चौहान ने कहा है कि पीली मटर के लगातार आयात से घरेलू दालों की कीमतें गिर गई हैं और इससे किसान दालों के रकबे का विस्तार करने से हतोत्साहित होंगे। चौहान ने कहा स्नैकिंग उद्योग में चने के सस्ते विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाले पीले मटर के लगातार शुल्क मुक्त आयात से बाजार की कीमतों में गिरावट आ रही है। चौहान ने बताया कि पीली मटर की कीमत एमएसपी से कम है। वर्तमान में पीली मटर की लागत लगभग 3,351 रुपये प्रति क्विंटल है, जो कि तुअर, मूंग और उड़द जैसी प्रमुख दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मंडी मूल्यों से काफी कम है।
व्यापारिक सूत्रों ने बताया कि इस दाल की किस्म, जिसका आयात वर्तमान में रूस और कनाडा से लगभग 355-360 डॉलर प्रति टन की दर से किया जा रहा है, का व्यापक रूप से नाश्ते में ‘बेसन’ के रूप में उपयोग किया जा रहा है। फसल वर्ष 2024-25 में चना उत्पादन 11.33 मिलियन टन (एमटी) होने का अनुमान है, जो देश के 25.23 मीट्रिक टन दाल उत्पादन का लगभग 50% है। चौहान ने कहा, “हमारे पास यह मानने के कारण हैं कि कम कीमतों पर पीली मटर का निरंतर आयात अन्य दालों में मिलावट को बढ़ावा दे रहा है और बाजार की कीमतों को भी विकृत कर रहा है।”

सूत्रों ने बताया कि पीली मटर के शुल्क-मुक्त आयात को जारी रखने के मुद्दे पर कई अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) की बैठकों में चर्चा हो चुकी है। इस महीने की शुरुआत में हुई दो आईएमसी बैठकों में पीली मटर की आयात नीति की समीक्षा की गई, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इससे पहले भारतीय दलहन संगठन, कैट, ग्रोमा ने सरकार से कई बार पीली मटर पर कम से कम 50% आयात शुल्क लगाने का आग्रह किया है ताकि घरेलू मंडी में कीमतें स्थिर रहें और किसानों को प्रोत्साहन मिले।” दिसंबर 2023 में सरकार ने पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी और समय-समय पर छूट बढ़ाई गई, जबकि वर्तमान छूट 31 मार्च, 2026 तक है।
दिसंबर 2023 से अब तक 3.5 मीट्रिक टन से अधिक पीली मटर का आयात किया जा चुका है। व्यापार सूत्रों ने कहा कि वर्तमान में लगभग 1 मीट्रिक टन दाल किस्म आयातकों के पास है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 0.45 मीट्रिक टन है जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने रबी विपणन सीजन (2025-26) के लिए मूल्य नीति में पीली मटर के आयात पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी, जिसमें कहा गया था कि इस तरह के आयात से घरेलू कीमतों और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एफई ने इस सप्ताह की शुरुआत में बताया था कि म्यांमार, मोज़ाम्बिक, तंजानिया और कनाडा से सस्ते आयात में बढ़ोतरी और अच्छी फसल की संभावनाओं के कारण प्रमुख दालों – तुअर, उड़द, मसूर और चना – की मंडी कीमतों में गिरावट आई है। कीमतें फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रही हैं।
शंकर ठक्कर ने कहा यदि कीमतें बेंचमार्क मूल्य से नीचे बनी रहीं तो यह प्रवृत्ति किसानों को आगामी रबी या सर्दियों के मौसम में चना और मसूर की बुवाई करने से हतोत्साहित कर सकती है इसलिए तुरंत पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात पर 50% आयात शुल्क लगाना चाहिए और यह हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी के स्वदेशी अभियान को भी समर्थन देता है। हमारे निवेदन का संज्ञान लेकर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं प्रवीण खंडेलवाल जी द्वारा उचित कार्यवाही किए जाने के लिए हम उनके आभारी हैं ।













