पालीताना से गिरनार तक भव्य छःरी पालित संघ यात्रा का आयोजन

शाश्वत श्री शत्रुंजय महातीर्थ से विश्वविख्यात श्री गिरनार महातीर्थ तक आयोजित होने जा रही भव्य छःरी पालित संघ यात्रा का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आस्था के वातावरण में हो चुका है। यह ऐतिहासिक पैदल संघ यात्रा संघवी सुखीबाबु संघोत्सव के अंतर्गत आयोजित की जा रही है।
मंगल प्रयाण और यात्रा अवधि
इस पावन संघ यात्रा का मंगल प्रयाण पोष शुक्ला 10, मंगलवार, दिनांक 30 दिसंबर 2025 को पालीताना से हुआ है।
संघ यात्रा का समापन माघ कृष्णा 12, गुरुवार, दिनांक 15 जनवरी 2026 को श्री गिरनार महातीर्थ पर होगा।
पावन निश्रा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन
इस संपूर्ण संघ यात्रा को आजीवन गुरु गुण चरण उपासक, श्रमणी गणनायक, सुखधाम परिवार के धर्मसारथी, परम पूज्य आचार्य देव श्रीमद् विजय रश्मिरत्नसूरीश्वरजी महाराजा एवं अन्य श्रमण-श्रमणी भगवंतों की प्रभावशाली और पावन निश्रा प्राप्त हो रही है। उनके सान्निध्य में यह यात्रा धर्म, तप, त्याग और संयम का अनुपम उदाहरण बनेगी।
आयोजक एवं विनीत
इस भव्य आयोजन के आयोजक एवं विनीत संघवी सुखीबेन बाबूलालजी अचलाजी (सुखधाम) परिवार हैं, जो शिवगंज, मुंबई और चेन्नई से जुड़े हुए हैं।
शत्रुंजय तीर्थ पर मंगल कार्यक्रम
संघ यात्रा से पूर्व शत्रुंजय तीर्थ पर भी विशेष मंगल कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं—
28 दिसंबर 2025 को गुरुभगवंतों का मंगल प्रवेश एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम
29 दिसंबर 2025 को गिरिराज पर्वत यात्रा, गुरुदेव का प्रवचन तथा संघोत्सव संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान की गईं

1200 यात्रियों की भव्य पदयात्रा
यह संघ यात्रा 28 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें लगभग 1200 श्रद्धालु यात्रियों का समावेश है। पूरी यात्रा के दौरान भव्य धार्मिक शोभायात्रा का स्वरूप देखने को मिलेगा।
यात्रा में हाथी और घोड़े,ढोल, शहनाई, विभिन्न पारंपरिक बैंड-बाजे,भगवान की सुसज्जित रथ यात्राएं शामिल हैं, जो संपूर्ण मार्ग को धर्ममय और उत्सवमय बना रहे हैं।
आस्था, भक्ति और परंपरा का संगम
पालीताना से गिरनार तक की यह छःरी पालित संघ यात्रा जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं, आस्था और सामूहिक साधना का जीवंत उदाहरण है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को धर्म, संयम और सद्भाव का संदेश भी देता है।
















