भीलवाड़ा को मिलेगी आधुनिक न्यायालय परिसर की सौगात, 62 बीघा भूमि पर हुआ भूमि पूजन



भीलवाड़ा को आधुनिक न्यायालय परिसर की सौगात
सांगानेर-तस्वारिया में 62 बीघा भूमि पर हुआ भूमि पूजन | न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
भीलवाड़ा: जिले को शीघ्र ही एक अत्याधुनिक न्यायालय परिसर की सौगात मिलने जा रही है।
सांगानेर-तस्वारिया क्षेत्र में 62 बीघा भूमि पर नए जिला न्यायालय परिसर के निर्माण हेतु
विधिवत भूमि पूजन किया गया। यह आयोजन न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
तकनीक और न्याय का संतुलन जरूरी
राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि
न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का समावेश समय की आवश्यकता है, लेकिन इसका उपयोग
व्यावहारिक और परिणामोन्मुख होना चाहिए।
उन्होंने ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को
न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने का माध्यम बताया।

सुदृढ़ न्याय व्यवस्था की नींव
उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने कहा कि यह भूमि पूजन,केवल एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं, बल्कि न्याय के सशक्त भविष्य की नींव है। उन्होंने न्याय व्यवस्था को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए इसे सुलभ और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा परिसर
प्रस्तावित न्यायालय परिसर में पर्याप्त न्यायालय कक्ष, अधिवक्ताओं के लिए सुव्यवस्थित चैंबर,
डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, पुस्तकालय, प्रतीक्षालय और पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इससे वर्तमान में स्थानाभाव से उत्पन्न समस्याओं का समाधान होगा।
नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण
कार्यक्रम के दौरान जिला अभिभाषक संस्था, भीलवाड़ा की वर्ष 2026 की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को
शपथ दिलाई गई। अध्यक्ष उम्मेद सिंह राठौड़ सहित अन्य पदाधिकारियों ने विधिवत शपथ ग्रहण की।

न्यायिक अधिकारियों के विचार
न्यायाधिपति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने न्यायिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को
सकारात्मक बताया। वहीं फरजंद अली ने युवा अधिवक्ताओं को परिश्रम और अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
न्यायाधिपति प्रवीर भटनागर ने अधिवक्ताओं को न्याय का प्रहरी बताते हुए उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
न्यायिक ढांचे को मिलेगा मजबूती
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभय जैन ने कहा कि 62 बीघा भूमि पर नए परिसर का निर्माण
न्यायिक अवसंरचना को सुदृढ़ करेगा और आमजन का विश्वास बढ़ाएगा।
वर्तमान न्यायालय वर्ष 1948 से संचालित हो रहा है और स्थान की कमी के कारण कई न्यायालय बाहर संचालित हो रहे हैं।
विशाल उपस्थिति
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता, न्यायालय स्टाफ एवं
बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मंच संचालन न्यायिक मजिस्ट्रेट
प्रियंका पुरोहित एवं अशोक व्यास द्वारा किया गया।











