मीरा-भायंदर मेट्रो: उद्घाटन में देरी और श्रेय की राजनीति पर सवाल

मीरा-भायंदर। शहर में प्रस्तावित मेट्रो सेवा का उद्घाटन लगातार टलने से परियोजना की तैयारी और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल उठने लगे हैं। पहले तय की गई तारीखें बीतने के बाद नई तिथियां घोषित की गईं—3 अप्रैल, फिर 6 अप्रैल और अब 7 अप्रैल—जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई स्टेशनों पर काम अभी अधूरा है। कहीं सीढ़ियों का निर्माण जारी है तो कहीं अन्य तकनीकी तैयारियां पूरी नहीं हो पाई हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूरी तैयारी से पहले उद्घाटन करना उचित होगा, खासकर जब मामला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा हो।
दूसरी ओर, मेट्रो शुरू होने से पहले ही श्रेय लेने की राजनीति तेज होती दिखाई दे रही है। शहर में लगे होर्डिंग और बैनर इस प्रतिस्पर्धा को स्पष्ट कर रहे हैं, जहां विभिन्न जनप्रतिनिधियों के समर्थक अपने-अपने नेताओं को इस परियोजना का प्रमुख चेहरा बताने में जुटे हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम के पास वितरण को लेकर भी खींचतान सामने आई है, जो यह संकेत देती है कि समन्वय की कमी अभी बनी हुई है। इस पूरी स्थिति ने यह बहस छेड़ दी है कि विकास कार्यों का केंद्र बिंदु नागरिकों की सुविधा होनी चाहिए या राजनीतिक लाभ।
शहरवासियों की अपेक्षा साफ है—वे बार-बार बदलती तारीखों के बजाय एक सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद मेट्रो सेवा चाहते हैं। ऐसे में यह जरूरी माना जा रहा है कि उद्घाटन से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि सेवा शुरू होने के बाद किसी प्रकार की समस्या न आए।
मेट्रो परियोजना को शहर के भविष्य की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इसलिए इसकी शुरुआत जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूर्ण तैयारी और विश्वसनीयता के साथ होनी चाहिए।
















