ग्रामीण बोले हर बजट में आशा, हर बार निराशा | क्या राजस्थान बजट 2026 बदलेगा गुरलां की तस्वीर?

ग्रामीण बोले – हर बजट में आशा, हर बार निराशा
वर्षों का इंतजार, फिर वही सवाल : क्या इस बार बदलेगी गुरलां की तस्वीर?

भीलवाड़ा जिले की पंचायत समिति सुवाणा का बड़ा कस्बा होने के बावजूद गुरला आज भी
बुनियादी प्रशासनिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है।
वर्षों से लंबित मांगें – गुरला को उप तहसील का दर्जा देने,
पंचायत समिति खोलने, पुलिस चौकी स्थापना,
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत करने
तथा ग्रामीण स्टेडियम निर्माण की अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में गुरला में उप तहसील और पंचायत समिति खोलने की घोषणाएं तो हुईं,
लेकिन वे धरातल पर नहीं उतर सकीं। बाद में ये घोषणाएं ठंडे बस्ते में चली गईं।
इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार के भी दो वर्ष पूरे हो चुके हैं,
लेकिन इन प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।

अब सरकार के तीसरे बजट राजस्थान बजट 2026 को लेकर गुरला और आसपास के ग्रामीणों की
उम्मीदें एक बार फिर केंद्रित हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उप तहसील नहीं होने से उन्हें राजस्व और प्रशासनिक कार्यों के लिए
5 किलोमीटर दूर कारोई उप तहसील या भीलवाड़ा तहसील कार्यालय जाना पड़ता है।
भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र जैसे कार्यों में
समय और धन दोनों की अनावश्यक बर्बादी होती है।
सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो पहले गुरला में पुलिस चौकी थी,
लेकिन वर्तमान में चौकी नहीं होने से सीमित अधिकारों के कारण
अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई में देरी होती है।
स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर कस्बे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है,
जहां प्रसव सुविधा और सामान्य जांच उपलब्ध हैं,
लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और
आपातकालीन उपचार की पर्याप्त व्यवस्था न होने से
गंभीर मरीजों को भीलवाड़ा या उदयपुर रेफर करना पड़ता है।
हाईवे 758 पर स्थित होने के कारण दुर्घटनाओं की स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत किए जाने से
विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, बेहतर उपचार और विस्तारित सेवाएं मिल सकेंगी।
इसके साथ ही नया आयुर्वेदिक चिकित्सालय नहीं होने से
ग्रामीण प्राकृतिक चिकित्सा से वंचित हैं।
शिक्षा क्षेत्र में भी कस्बे में विज्ञान संकाय खोलने की मांग लंबे समय से की जा रही है,
ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।
इसी क्रम में ग्रामीणों ने राजस्थान बजट 2026 में
उप तहसील, पुलिस चौकी, सीएचसी, आयुर्वेदिक चिकित्सालय,
रोडवेज बस स्टैंड घोषित करने, चम्बल परियोजना से जोड़ने
तथा शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए
शिव नगर के ओपन कुएं से पाइपलाइन जोड़ने,
जर्जर टंकी हटाकर अमृत 2 योजना के तहत
उच्च जलाशय निर्माण की मांग उठाई है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार बजट में इन मांगों पर ठोस निर्णय लेकर
उन्हें धरातल पर उतारा जाएगा।
अब देखना यह होगा कि क्या बजट 2026 वास्तव में गुरला को
बुनियादी सुविधाओं की सौगात देगा,
या फिर यह कस्बा एक बार फिर आश्वासनों और इंतजार तक ही सीमित रह जाएगा।
कस्बे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों और
आपातकालीन उपचार की सुविधा नहीं होने से गंभीर मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने से बड़ी आबादी को राहत मिलेगी।
साथ ही नया आयुर्वेदिक चिकित्सालय जरूरी है।
बड़ा कस्बा होने के बावजूद उप तहसील और पंचायत समिति नहीं होने से
प्रशासनिक कार्यों के लिए भीलवाड़ा और सुवाणा जाना पड़ता है।
इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
पुलिस चौकी नहीं होने से कई मामलों में तत्काल कार्रवाई संभव नहीं हो पाती।
चौकी को थाने में क्रमोन्नत किए जाने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।













