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विधानसभा में नियम विरूद्ध आवंटित जिंदल सॉ लिमिटेड के खनन पट्टों पर गूंजा मुद्दा

विधायक अशोक कोठारी ने की गहन जांच की मांग,सरकार ने निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन

Narendra Kumar Regar

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने राजस्थान विधानसभा में नियम 131 के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत कर जिंदल सॉ लिमिटेड को आवंटित खनन पट्टों में कथित अनियमितताओं का मामला जोरदार ढंग से उठाया।

मंत्री द्वारा दिए गए जवाब को अपूर्ण बताते हुए विधायक ने पूरे प्रकरण की पुनः गहन जांच कराने की मांग की।

विधायक कोठारी ने सदन में सात प्रमुख बिंदुओं पर सरकार से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में कंपनी को खनन लीज देने में एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा 11(5) के प्रावधानों की अनदेखी की गई, भारत सरकार से उक्त धारा के तहत स्वीकृति प्राप्त नहीं किये बिना ही उस समय की तत्कालीन सरकार द्वारा जिंदल को खनिज हेतु लीज आवंटन किया किया I विधायक कोठारी ने वर्ष 2010 में हुई आवंटन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने खनन आवंटन की शर्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी को 4 वर्ष में स्टील प्लांट स्थापित करना था तथा 10 करोड़ रुपये की कीननेस मनी जमा कराई गई थी, 4 वर्ष में प्लांट स्थापित नहीं होने की दशा में किननेस मनी जप्त करने का प्रावधान था पर शर्तों के उल्लंघन के बावजूद उक्त FD को लौटा दिया गया। आरोप लगाया गया कि स्टील प्लांट स्थापित किए बिना खनिज का दोहन कर राज्य के बाहर भेजा जा रहा है, जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है।

विधायक ने पर्यावरणीय शर्तों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना कर नदी-नालों, तालाबों के कैचमेंट एरिया तथा ग्रामीण रास्तों को क्षतिग्रस्त किया गया, बावजूद इसके लीज निरस्त नहीं की गई और न ही प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई हुई।

चारागाह भूमि के मामले में कोठारी ने आरोप लगाया कि 631/05 खनन पट्टे में सैकड़ों हेक्टेयर गोचर भूमि बिना वैकल्पिक क्षतिपूर्ति के आवंटित कर दी गई, जबकि संबंधित अधिकारियों ने इसे अनुपयुक्त बताया था। 15 वर्ष बाद भी पशुधन के लिए समुचित क्षतिपूर्ति भूमि उपलब्ध नहीं कराए जाने पर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

इसके अतिरिक्त उन्होंने पूर्व समझौतों के तहत भीलवाड़ा शहर के रामधाम क्षेत्र में प्रस्तावित आरओबी निर्माण तथा नगर निगम को देय अनुबंध राशि को सीएसआर मद में दर्शाने के मुद्दे पर भी सरकार से स्पष्ट कार्रवाई की मांग की।

स्टील प्लांट स्थापना में 15 वर्ष की देरी पर सवाल उठाते हुए विधायक ने कहा कि बार-बार समयवृद्धि के बावजूद धरातल पर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, जिससे स्थानीय रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

अंत में लापिया प्वाइंट पर अवैध ब्लास्टिंग के आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने डीजीएमएस से भौतिक सत्यापन कराने और पुर में प्रभावित मकानों की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध विस्फोटन से ग्रामीणों के घरों में दरारें आई हैं तथा लोग लंबे समय से आंदोलनरत हैं।

विधायक कोठारी ने कहा कि उद्योग क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक हैं लेकिन किसी भी कंपनी को नियमों और अनुबंध की शर्तों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जिंदल सॉ लिमिटेड द्वारा किए जा रहे कथित उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शर्तों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।

विधान सभा के पटल पर रखे गए मुद्दे बिंदुवार

आवंटित खनन पट्टो की स्वीकृति में नियमों की अनदेखी

कंपनी को वर्ष 2010 में बिना खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 11(5) की केंद्र सरकार से स्वीकृति लिए खनन लीज दे दी गई, जबकि पूर्व में अन्य आवेदनों के लंबित होने के बावजूद “पहले आओ-पहले पाओ” नियम लागू नहीं हो सकता था।

शर्तों का उल्लंघन

30 वर्ष की लीज देते समय 4 वर्ष में स्टील प्लांट स्थापित करने, 10 करोड़ रुपये की कीननेस मनी जमा कराने तथा प्लांट स्थापित होने तक खनिज बेचान पर रोक की शर्तें रखी गई थीं। आरोप है कि 15 वर्ष बाद भी स्टील प्लांट नहीं लगा और कीननेस मनी भी वापस लौटा दी गई

खनिज का बाहरी निर्गमन

प्लांट स्थापित किए बिना बड़ी मात्रा में लौह अयस्क राज्य से बाहर भेजे जाने पर सवाल उठाए गए, जिससे राज्य राजस्व व डी एम एफ टी फंड को नुकसान बताया गया।

पर्यावरणीय व न्यायालयीय आदेशों की अवहेलना

जिला कलेक्टर की शर्तों एवं उच्च न्यायालय के “अब्दुल रहमान बनाम सरकार” निर्णय के बावजूद नदी-नालों, केचमेंट एरिया व जलमार्ग अवरुद्ध करने के आरोप लगाए गए। प्रकरण एन जी टी में भी विचाराधीन रहा, परंतु लीज निरस्त नहीं की गई।

चारागाह भूमि का मुद्दा

खनन पट्टा 631/05 में सैकड़ों हेक्टेयर गोचर भूमि बिना समुचित क्षतिपूर्ति के आवंटित करने का आरोप लगाया गया। पशुधन की कमी के बावजूद 15 वर्षों में वैकल्पिक चारागाह उपलब्ध नहीं कराया गया

रामधाम आरओबी व सीएसआर विवाद

पूर्व समझौतों के तहत भीलवाड़ा में रामधाम पर आरओबी निर्माण व नगर निगम को देय राशि को सीएसआर मद में दर्शाने के मामले में भी कार्रवाई की मांग की गई।

अवैध ब्लास्टिंग के आरोप

लापिया पॉइंट व जालिया क्षेत्र में मानकों से अधिक विस्फोटक उपयोग, मकानों में दरारें व जनहानि की शिकायतों का उल्लेख करते हुए डीजीएमएस से भौतिक सत्यापन की मांग की गई। एनजीटी द्वारा 4 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति आदेश का भी हवाला दिया गया।

Khushal Luniya

Meet Khushal Luniya – A Young Tech Enthusiast, AI Operations Expert, Graphic Designer, and Desk Editor at Luniya Times News. Known for his Brilliance and Creativity, Khushal Luniya has already mastered HTML and CSS. His deep passion for Coding, Artificial Intelligence, and Design is driving him to create impactful Digital Experiences. With a unique blend of technical skill and artistic vision, Khushal Luniya is truly a rising star in the Tech and Media World.

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