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हनुमान जन्मोत्सव दो बार क्यों मनाया जाता है? जानें इसकी वजह
आज दक्षिण भारत में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता

गुरलां। भगवान हनुमान के जन्मोत्सव का पर्व हिंदू धर्म में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। बजरंगबली को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जन्मोत्सव के दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हालांकि, कई बार तिथियों के कारण हनुमान जन्मोत्सव 2025 की तारीख को लेकर भक्तों में कन्फ्यूजन बनी रहती है, तो आइए इस आर्टिकल के जरिए
क्यों साल में दो बार आता है हनुमान जन्मोत्सव?
हनुमान जन्मोत्सव साल में दो बार आता है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। कहते हैं कि इस दिन हनुमान जी का अवतरण हुआ था। वहीं, दक्षिण भारत में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि इस दिन भगवान हनुमान को देवी सीता ने अमर होने का वरदान दिया था।

हनुमान जन्मोत्सव पूजा विधि
- इस दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- एक वेदी पर भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित करें।
- उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
- सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
- फूल, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और हनुमान अष्टक का पाठ करें।
- भाव के साथ आरती करें।
- इस दिन अखंड रामायण का पाठ भी शुभ माना जाता है।
- अंत में पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे।













