312वें सप्ताह भी जारी सेवा श्रम: बनेड़ा-सुल्तानगढ़ में ‘पो’ सफाई अभियान ने पेश की मिसाल

- परमेश्वर दमामी | लुनिया टाइम्स न्यूज | बनेड़ा
समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण का दुर्लभ उदाहरण बनेड़ा क्षेत्र में लगातार देखने को मिल रहा है। अपना संस्थान और पर्यावरण संरक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में चल रहा सेवा श्रम अभियान अब 312वें सप्ताह में भी पूरे जोश और निरंतरता के साथ जारी है।
सुबह 7 बजे से शुरू हुआ सफाई अभियान
तहसील अध्यक्ष मुरली मनोहर व्यास ने बताया कि 5 अप्रैल 2026 को प्रातः 7:00 से 8:00 बजे तक बनेड़ा-सुल्तानगढ़ रोड पर खटीक समाज के मोक्षधाम के बाहर व्यापक सफाई अभियान चलाया गया।
इसके बाद 8:15 से 9:15 बजे तक सुल्तानगढ़, कोडलाई और अमरपुरा के विभिन्न स्थानों पर ‘पो’ (पेयजल स्रोत) की सफाई का कार्य किया गया।
कई स्थानों पर चला स्वच्छता अभियान
सफाई अभियान के तहत जिन स्थानों को साफ किया गया, उनमें शामिल हैं—
- सुल्तानगढ़ में तालाब की पाल के नीचे
- कोडलाई में बाईपास क्षेत्र
- अमरपुरा में किशनपुरिया रोड स्थित ‘पो’
हर स्थान पर टीम ने सुनियोजित तरीके से सफाई कार्य को अंजाम दिया।

वैज्ञानिक तरीके से की गई सफाई
अभियान के दौरान सिर्फ सामान्य सफाई नहीं, बल्कि व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई—
- ‘पो’ को पूरी तरह खाली किया गया
- जमा कचरा, मलवा और काई हटाई गई
- एसिड से सफाई कर संक्रमण मुक्त किया गया
- पानी से धुलाई के बाद कल्ली की पुताई की गई
इस प्रक्रिया से इन जल स्रोतों को फिर से स्वच्छ और उपयोग योग्य बनाया गया।
बड़ी संख्या में लोगों ने किया श्रमदान
इस सेवा कार्य में बनेड़ा और सुल्तानगढ़ क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जो इस अभियान की सामाजिक ताकत को दर्शाती है।
6 साल से अधिक समय से लगातार सेवा
312 सप्ताह का मतलब है कि यह अभियान करीब 6 वर्षों से बिना रुके चल रहा है।
यह निरंतरता अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जो बताती है कि यह पहल सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बन चुकी है।
समाजहित में जारी रहेगा अभियान
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि—
“यह सेवा कार्य हर मौसम में लगातार जारी रहेगा और समाजहित में इसी तरह श्रमदान होता रहेगा।”
जहां एक ओर स्वच्छता के लिए सरकारी योजनाएं चलती हैं, वहीं बनेड़ा का यह अभियान बताता है कि जब समाज खुद जिम्मेदारी उठाता है, तो बदलाव संभव है।
312 सप्ताह तक लगातार चल रहा यह सेवा श्रम न सिर्फ स्वच्छता का संदेश दे रहा है, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी की मजबूत मिसाल भी पेश कर रहा है।













