जम्मू-कश्मीर में बादल फटा, तबाही से 65 से ज्यादा मौतें – रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
- किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर)
स्वतंत्रता दिवस की सुबह जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने से आई बाढ़ और मलबे ने तबाही मचा दी।
हादसा पदम, मरवाह और वडवान घाटियों में हुआ, जहां अचानक तेज़ बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ गया और भारी मलबा गांवों में घुस गया। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 65 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 80 से अधिक लोग घायल हैं। कई लोग अभी भी लापता हैं।
कैसे हुआ हादसा
- सुबह करीब 5:30 बजे बादल फटने की घटना हुई।
- कुछ ही मिनटों में तेज़ पानी और मलबा ढलानों से बहकर निचले इलाकों में पहुंचा।
- स्थानीय घर, दुकानें, पुल और सड़कें बह गईं।
प्रभावित क्षेत्र
- पदम गांव – सबसे ज्यादा नुकसान, कई घर पूरी तरह ढहे।
- मरवाह घाटी – खेतों और बागानों को भारी नुकसान।
- वडवान – स्कूल और सामुदायिक भवन क्षतिग्रस्त।
रेस्क्यू और राहत कार्य
- NDRF, SDRF और सेना की टीमें मौके पर तैनात।
- हेलीकॉप्टर के जरिए फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
- मेडिकल टीमों ने अस्थायी अस्पताल बनाए हैं।
- प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 मुआवज़ा देने की घोषणा की है।

सरकार की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ट्वीट कर पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि “मानव जीवन की हानि असहनीय है, हम हर संभव मदद देंगे”।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति पर लगातार नजर रखने और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
चुनौतियां
- तेज़ बारिश के कारण रेस्क्यू में दिक्कत।
- सड़कें टूटने से कई गांवों का संपर्क टूटा।
- मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में और बारिश की चेतावनी दी है।
स्थानीय लोगों का हाल
बचे हुए लोग खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं। पानी और खाने की किल्लत है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दवा और कपड़ों की आवश्यकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण के कारण बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं का संकेत है। अगर समय पर मजबूत जल-निकासी और पहाड़ी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।













