इरोड में 116 तपस्वियों का ऐतिहासिक राजशाही पारणा, तीन दिवसीय महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

इरोड | संवाददाता | 20 अप्रैल 2026
तमिलनाडु के इरोड में श्री शत्रुंजय वर्षीतप समिति के तत्वावधान में 116 तपस्वियों के वर्षीतप पारणा के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय भव्य महोत्सव (18, 19 व 20 अप्रैल) हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम साधु-साध्वी भगवंतों की पावन निश्रा में आयोजित हुआ, जिसमें आचार्य इंद्रजीत सूरीजी के शिष्य पन्यासप्रवर सूर्योदय विजयजी तथा आचार्य अभयशेखर सूरीजी की आज्ञानुवर्तीनी साध्वी संस्कारनिधि श्रीजी सहित अन्य संतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
समिति के विनोद करबावाला ने जानकारी देते हुए बताया कि महोत्सव के प्रथम दिन 18 अप्रैल को श्री वासुपूज्य जैन भवन में भक्तामर महापूजन एवं संध्या भक्ति का आयोजन हुआ। दूसरे दिन 19 अप्रैल को श्री कुंकूनाथ जिनालय से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो बैंड-बाजों, ढोल, रथों और आकर्षक झांकियों के साथ नगर भ्रमण करती हुई परीमलम महोत्सव स्थल पहुंची। यहां गुरु पूजन, अभिनंदन समारोह, गांव सांझी और शाम को भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए गए।

तीसरे दिन 20 अप्रैल को प्रातः 6 बजे श्री वासुपूज्य जिनालय में भगवान आदिनाथ का इक्षुरस से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात सुबह 8:30 बजे परीमलम हॉल में 116 तपस्वियों का राजशाही पारणा सम्पन्न हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। इन तपस्वियों में कई साधकों ने 13 महीनों का कठोर वर्षीतप पूर्ण किया। पारणा के अवसर पर नरेन्द्र परमार एवं भरत परमार द्वारा माला व तिलक कर बहुमान किया गया, जबकि समिति द्वारा सभी तपस्वियों एवं लाभार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से आए समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे। भक्ति संध्या में पारस गडा और जैनम वारिया ने प्रस्तुति दी, वहीं संचालन स्मित कोठारी एवं राजशाही पारणा का संचालन ललित कवाड द्वारा किया गया। समिति के सदस्यों के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में भोजन की भी उत्कृष्ट व्यवस्था रही। राजशाही पारणा के मुख्य लाभार्थी ललित करबावाला (सादड़ी) रहे। समाजजनों ने इसे ऐतिहासिक आयोजन बताते हुए तपस्वियों की साधना के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की।














