उदयपुर में उबेश्वर जी बना प्राकृतिक पर्यटन का नया आयाम: जल संरचनाओं और शिव वन उद्यान का राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने किया लोकार्पण
राज्यपाल कटारिया ने कहा, “उबेश्वर महादेव का यह झरना जल्द ही पर्यटकों का बड़ा आकर्षण बनेगा। उदयपुर में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और नए स्थल विकसित करने की आवश्यकता है।”

उदयपुर के उबेश्वर जी में विकसित शिव वन उद्यान और जल संरचनाएं बनीं प्राकृतिक पर्यटन की नई पहचान
-
📍 राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने किया लोकार्पण, इको टूरिज्म को मिलेगा नया बढ़ावा
उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर जिले में प्राकृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम देते हुए मंगलवार को उबेश्वर जी में वन विभाग द्वारा निर्मित जल संरचनाओं और शिव वन उद्यान का भव्य लोकार्पण किया गया। पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण एवं वन मंत्री श्री संजय शर्मा और टीएडी मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी भी मौजूद रहे। अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह क्षेत्र अब इको-टूरिज्म का नया केंद्र बनता जा रहा है। यहां शिव मंदिर के समीप बहने वाले झरने को तीन स्तरों पर जल संरचनाओं के जरिए आकर्षक रूप दिया गया है।
कार्यक्रम में “हरयाळो राजस्थान – एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण भी किया गया। पेड़ लगाने वाले व्यक्ति को उसकी सेल्फी अपलोड करने पर मिलेगा डिजिटल सर्टिफिकेट, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तस्वीरें भी होंगी।

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””]👉 हाइलाइट्स: ✅ उबेश्वर जी में तीन स्तरीय जल संरचनाएं बनीं आकर्षण का केंद्र ✅ शिव वन उद्यान का शुभारंभ, इको-टूरिज्म को मिलेगा नया जीवन ✅ हरयाळो राजस्थान अभियान के तहत पेड़ लगाकर मिलेगी डिजिटल मान्यता ✅ राज्यपाल कटारिया की सक्रियता से लगातार हो रहा प्राकृतिक स्थलों का विकास[/box]
- 📍 इको टूरिज्म को मिलेगा नया संबल, ‘हरयाळो राजस्थान’ के तहत पौधारोपण, सेल्फी पर मिलेगा डिजिटल सर्टिफिकेट
🔷 पर्यावरण, आस्था और पर्यटन का त्रिवेणी संगम
राजस्थान का उदयपुर जिले अब केवल झीलों और महलों का ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन और हरित विकास का प्रमुख केंद्र भी बनता जा रहा है। मंगलवार को इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया ने उबेश्वर जी में वन विभाग द्वारा निर्मित जल संरचनाओं और शिव वन उद्यान का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री संजय शर्मा, जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी, विधायक ताराचंद जैन, विधायक फूलसिंह मीणा, और विंग कमांडर वी.वी. मेहर भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
उबेश्वर जी – अब सिर्फ धार्मिक नहीं, पर्यावरणीय आस्था का केंद्र
उदयपुर से लगभग 20 किमी दूर, अरावली की पहाड़ियों में स्थित उबेश्वर महादेव का क्षेत्र हमेशा से आस्था का केंद्र रहा है। अब यहां वन विभाग द्वारा तीन स्तरीय जल संरचनाएं विकसित की गई हैं, जिससे यहां का प्राकृतिक झरना और अधिक सुंदर व पर्यटक अनुकूल बन गया है। इसके साथ ही “शिव वन उद्यान” का निर्माण इस क्षेत्र को इको टूरिज्म का नया चेहरा दे रहा है।
राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने क्या कहा?
“यह क्षेत्र भगवान उबेश्वर महादेव की कृपा और संत अवधेशानंद महाराज के चातुर्मास के बाद तेज़ी से विकसित हुआ है। यह झरना आने वाले समय में पर्यटकों का बड़ा आकर्षण बनेगा। उदयपुर में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं — हमें नए स्थल चिन्हित कर उन्हें विकसित करना चाहिए।”
हरयाळो राजस्थान: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अभिनव पहल
इस कार्यक्रम के दौरान ‘हरयाळो राजस्थान – एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत सभी गणमान्य व्यक्तियों ने पौधारोपण किया।
वन मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि:
“हर व्यक्ति एक पेड़ लगाकर उसके साथ सेल्फी ले और हरयाळो राजस्थान पोर्टल पर अपलोड करे। इसके बदले में उसे एक डिजिटल प्रमाण पत्र मिलेगा, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तस्वीर होगी। यह प्रमाण पत्र उसकी पर्यावरणीय भागीदारी का सबूत होगा।”
इको टूरिज्म के विस्तार की अपार संभावनाएं
- उदयपुर पहले ही एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल है, लेकिन अब आसपास के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों को इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- वन विभाग, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर इन स्थलों को पर्यावरण, रोजगार और संस्कृति के केंद्र के रूप में उभार रहे हैं।
- बाबूलाल खराड़ी ने सुझाव दिया कि महाराणा प्रताप के समकालीन स्थलों को भी पर्यटन नक्शे पर लाने की आवश्यकता है।
सोशल मीडिया अभियान: पर्यावरण का उत्सव
- हरियालो राजस्थान अभियान को युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों के लिए इंटरनेट फ्रेंडली बनाया गया है।
- पेड़ लगाकर सेल्फी अपलोड करने पर मिलने वाला डिजिटल सर्टिफिकेट न केवल प्रेरणा देता है, बल्कि यह भविष्य में एक डिजिटल पर्यावरण वॉलंटियर बैज की तरह कार्य करेगा।
उबेश्वर जी क्षेत्र का यह नया विकास न सिर्फ पर्यटन को गति देगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह राजस्थान में पर्यावरण-आधारित पर्यटन का मॉडल बनेगा। यह पहल दर्शाती है कि कैसे सरकार, समाज और संस्कृति मिलकर प्राकृतिक धरोहरों को संजो सकते हैं।















