बाली की बेटी ध्रुवी राठौड़ की कला का विश्व मंच पर परचम, जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में पेंटिंग का ऑक्शन

ध्रुवी राठौड़ ने बाली/भायंदर का नाम किया रोशन
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेंटिंग की सराहना, जेनेवा में हुआ ऑक्शन
बाली/भायंदर। राजस्थान के पाली जिले की बाली तहसील तथा महाराष्ट्र के भायंदर क्षेत्र की होनहार बेटी कु. ध्रुवी राठौड़ ने अपनी प्रतिभा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाते हुए क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। ध्रुवी द्वारा बनाई गई उत्कृष्ट पेंटिंग को अक्षय शक्ति वेलफेयर एसोसिएशन के माध्यम से जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऑक्शन में प्रस्तुत किया गया, जहाँ इसे सराहना मिली।

ध्रुवी राठौड़, बाली/भायंदर निवासी स्वर्गीय श्रीमती सुखी बाई बाबूलाल जी राठौड़ की पौत्री तथा सो. मोनिका महिपाल राठौड़ की सुपुत्री हैं। वे एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं और बचपन से ही संघर्ष, अनुशासन व निरंतर मेहनत के बल पर आगे बढ़ती रही हैं। वर्तमान में ध्रुवी विज्ञान वर्ग की छात्रा हैं, इसके बावजूद कला के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं।

गौरतलब है कि इससे पूर्व भी ध्रुवी राठौड़ महाराष्ट्र राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। कला के प्रति उनकी लगन, सृजनात्मक सोच और निरंतर अभ्यास ने उन्हें कम उम्र में ही बड़ी पहचान दिलाई है। जेनेवा में पेंटिंग का ऑक्शन में चयन होना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह उनके परिवार, समाज और गांव के लिए भी गर्व का विषय है।
इस उपलब्धि पर श्री ओसवाल जैन संघ, बाली के अध्यक्ष श्री बाबूलाल जी मंडलेसा, पूर्व सांसद श्री मीठालाल जी जैन तथा पूर्व विधायक श्रीमती गीता भरत जैन ने ध्रुवी राठौड़ को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। सभी ने कहा कि ध्रुवी जैसी प्रतिभाएँ नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं और क्षेत्र का मान बढ़ाती हैं।

बाली की बेटी ध्रुवी राठौड़ की यह सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प, मेहनत और प्रतिभा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचा जा सकता है। बाली की बेटी ने अपनी कला से न केवल अपना, बल्कि अपने परिवार, जैन समाज और पूरे गांव का नाम रोशन किया है।
















