राजस्थान में ‘विकास’ की पोल: वेरा रामपुरा बना सिस्टम की नाकामी का जीवंत सबूत

राजस्थान में ‘विकास’ की पोल: वेरा रामपुरा बना सिस्टम की नाकामी का जीवंत सबूत
पांच साल में सड़क नहीं, नाली नहीं… गलियां बनी जहरीले तालाब; बच्चे–बुजुर्ग कैद, जनता का अल्टीमेटम—“अबकी बार आर-पार”
रिपोर्ट: स्थानीय संवाददाता पुखराज कुमावत सुमेरपुर
अगर विकास के दावों की असली तस्वीर देखनी हो तो सिरोही जिले के वेरा रामपुरा गांव पहुंच जाइए। यहां गलियां सड़क नहीं, दलदल बन चुकी हैं। पानी निकासी का नामोनिशान नहीं है। बदबूदार जलभराव ने पूरे गांव को बीमारियों के खतरे के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
पांच साल में विकास के नाम पर क्या हुआ—इस सवाल का जवाब खुद गांव कीचड़ में खड़ा होकर दे रहा है।
गांव या ‘गंदे पानी का कैम्प’?
मुख्य रास्ते तालाब में तब्दील हो चुके हैं। घरों के बाहर घुटनों तक कीचड़ जमा है। बरसात बीते महीनों हो चुके हैं, लेकिन पानी अब भी सड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात हो या सर्दी, गंदा पानी हमेशा घरों के बाहर जमा रहता है।
- पक्की नाली नहीं
- सीसी सड़क अधूरी या नदारद
- स्थायी ड्रेनेज प्लान शून्य
ग्रामीणों का आरोप है कि मीडिया में मुद्दा उठने के बाद भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अफसर “भूमिगत” हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर असर, बुजुर्ग घरों में कैद
स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ में फिसलते हुए निकलने को मजबूर हैं। कई बार गिरने और बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। बुजुर्ग और महिलाएं घरों में कैद जैसी स्थिति में हैं क्योंकि बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है।
ग्रामीण पूछ रहे हैं—क्या यही विकसित राजस्थान है?
पांच साल का हिसाब दो
गांव में हुए कथित विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं—
- स्वीकृत बजट कितना था?
- खर्च कहां हुआ?
- गुणवत्ता जांच किसने की?
- जिम्मेदार अधिकारी कौन है?
लोगों का कहना है कि यदि काम कागजों में पूरे दिखाए गए हैं तो यह सीधे तौर पर जनता के साथ धोखा है।
सरकार को सीधी चुनौती
अगर 15 दिन में ठोस काम शुरू नहीं हुआ तो जिला मुख्यालय पर उग्र आंदोलन होगा।”
गांव में बैठक कर निर्णय लिया गया है कि प्रशासनिक टीम, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर आकर सार्वजनिक निरीक्षण करें। जवाबदेही तय हो और टाइमलाइन लिखित में जारी की जाए।
अब प्रदेश की नजर
वेरा रामपुरा की तस्वीरें प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं। सवाल केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली का है।
क्या प्रशासन खुद आकर इस जमीनी सच्चाई को देखेगा, या फिर यह गांव यूं ही दलदल में डूबा रहकर विकास के दावों की पोल खोलता रहेगा?
वेरा रामपुरा इंतजार में है—कार्रवाई का, जवाबदेही का और उस दिन का जब उसकी गलियां सच में सड़क कहलाएंगी।













