सत्य का धारण करना ही श्राद्ध है : मगाराम आर्य

- पाली
आर्य समाज पाली के प्रधान मगाराम आर्य ने कहा कि “सत्य का धारण करना ही वास्तविक श्राद्ध है।” श्रद्धापूर्वक मन में प्रतिष्ठा रखकर विद्वान, अतिथि, माता-पिता और आचार्य की सेवा करना ही श्राद्ध कहलाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्राद्ध जीवित माता-पिता, गुरु और आचार्यों का ही होता है, मृतकों का नहीं।
मगाराम आर्य ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को श्राद्ध केवल तीन पीढ़ी तक करने का विधान है। वैदिक काल में मृतक श्राद्ध का कोई उल्लेख नहीं मिलता। वेदों में तो माता-पिता और गुरु की सेवा का ही स्पष्ट आदेश दिया गया है। अथर्ववेद (3/30/2) का उद्धरण देते हुए उन्होंने
कहा – “अनुव्रतः पितुः पुत्रो मात्रा भवतु संमनाः।”
अर्थात – पुत्र पिता के अनुकूल कर्म करने वाला और माता के साथ उत्तम मन से व्यवहार करने वाला हो।
वे रविवार को आर्य समाज के साप्ताहिक अधिवेशन में उपस्थित आर्यों को श्राद्ध पक्ष के महत्व पर सम्बोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम की शुरुआत
इससे पूर्व आर्य समाज मंत्री विजयराज आर्य के ब्रह्मत्व में आचमन, अंग स्पर्श, ईश्वर स्तुति-प्रार्थना, उपासना और शान्तिकरण मंत्रों से ईश्वर का गुणगान किया गया। इसके बाद देव यज्ञ कर विश्व कल्याण और सबके स्वास्थ्य की मंगलकामना की गई। रिंकू पंवार ने आर्य समाज के नियमों का वाचन किया। जयघोष और शांति पाठ के साथ अधिवेशन का समापन हुआ।
मौजूद रहे
इस अवसर पर मगाराम आर्य, धनराज आर्य, गजेन्द्र अरोड़ा, घेवरचन्द आर्य, विजयराज आर्य, पूनमदास वैष्णव, हेमन्त वैष्णव, राहुल कुमार, रिंकू पंवार, अनिता बंसल सहित अनेक आर्यजन मौजूद रहे।














