करमाल चौराहा बनेगा ‘मिनी नाडोल’, प्रवासियों ने दिया विकास का भरोसा

Gopal Singh Khokhara
देवगढ़ में 3 मई 2026 को श्री आद्यशक्ति आशापुरा माता मंदिर ट्रस्ट, करमाल चौराहा की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मदन सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राम सिंह कुम्पावत (प्रवेश समिति अध्यक्ष) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में हजारी सिंह डिंगोड़, समुद्र सिंह (नेवो की खेजड़ी), भीमसिंह बांसोर और जेठसिंह गुड़ा बरजालिया शामिल रहे।
बैठक की शुरुआत अतिथियों के तिलक और माला पहनाकर स्वागत के साथ हुई। इस दौरान करमाल चौराहा स्थित श्री आद्यशक्ति आशापुरा माता मंदिर का विकास नाडोल की तर्ज पर करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रवासी समाजबंधुओं ने इस विकास कार्य में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
ट्रस्ट के सचिव माधुसिंह खिमावत ने बैठक का एजेंडा प्रस्तुत किया, जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। बैठक में सहसचिव जयरामसिंह गहलोत, चाप सिंह कुम्पावत, जेठसिंह कुम्पावत, वरदसिंह खिमावत, मदनसिंह कनियात, भीमसिंह बांसोर और रामसिंह कुम्पावत सहित कई सदस्यों ने अपने विचार रखे।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर निर्माण में 11,000 रुपये या उससे अधिक का योगदान देने वाले दानदाताओं की सूची तैयार कर सार्वजनिक की जाएगी और उनके नाम का शिलालेख मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा।
इसके अलावा, मारवाड़ क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों को ट्रस्ट की कार्यकारिणी में शामिल करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया, जो ट्रस्ट की नियमावली के अनुसार होगा। आगामी 31 मई 2026 को सुबह 10 बजे मारवाड़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों की एक बड़ी बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जो ट्रस्ट और रावत राजपूत महासभा ब्यावर के सानिध्य में होगी।
मंदिर से जुड़े सभी धार्मिक कार्यों में समाज के हर व्यक्ति द्वारा तन, मन और धन से सहयोग देने का संकल्प लिया गया। तैयारी बैठक 10 मई को आयोजित की जाएगी।
इस अवसर पर मदनसिंह, रामसिंह (अध्यक्ष, प्रवेश समिति), सचिव माधुसिंह खिमावत, सहसचिव जयरामसिंह गहलोत, कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह गहलोत, वरदसिंह खिमावत, प्रभुसिंह सोडावत, गोविंदसिंह कनियात, रुपसिंह देवावत, चाप सिंह कुम्पावत, हजारीसिंह धामावत, जेठूसिंह, भीमसिंह बांसोर, घिसासिंह, गुमानसिंह, समुद्रसिंह, देवेंद्रसिंह, डाउसिंह, सोहनसिंह सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन माधुसिंह खिमावत ने किया।











