मोहनखेड़ा महातीर्थ से मुनि पीयूषचन्द्र विजयजी का राणकपुर महातीर्थ की ओर विहार प्रारंभ

मोहनखेड़ा महातीर्थ से जैन संत मुनि पीयूषचन्द्र विजयजी म.सा. का राणकपुर महातीर्थ, राजस्थान की ओर विहार प्रारंभ हो गया है। यह विहार 1 मई 2026, शुक्रवार प्रातः आरंभ हुआ। परोपकार सम्राट गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि पीयूषचन्द्र विजयजी अष्टम वर्षीतप की विशेष साधना के अंतर्गत इस धार्मिक यात्रा पर निकले हैं। राणकपुर महातीर्थ का जैन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज ने प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की कठोर तपस्या (अठ्म तप) की थी। इसी साधना के प्रभाव से चक्रेश्वरी देवी बालिका रूप में प्रकट होकर दर्शन देकर साधना को सफल बताया था।

इसी पावन और ऊर्जा से परिपूर्ण भूमि पर मुनि पीयूषचन्द्र विजयजी अपनी साधना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विहार कर रहे हैं। उनके इस विहार को दादा गुरुदेव की द्विशताब्दी महोत्सव से भी जोड़ा जा रहा है, जिसे भव्य और आध्यात्मिक रूप से सफल बनाने की भावना व्यक्त की गई है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं से “ऊ अर्हम नम:” का जाप करने की अपील की गई है। आयोजन से जुड़े सेवकों ने सभी गुरु भक्तों से इस आध्यात्मिक यात्रा में भावनात्मक सहभागिता निभाने का आह्वान किया है।














