
अंधकासुर का अत्याचार बढ़ा तो शिव ने लिया भैरव अवतार : वसंत विजयानंद गिरी
पाली के अणुव्रत नगर स्थित विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित 9 दिवसीय भैरव कथा, साधना एवं महालक्ष्मी यज्ञ में श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़ उमड़ रही है।
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

मंगलवार को कथा वाचन के दौरान गुरुदेव ने भैरव उत्पत्ति प्रसंग का मार्मिक और ओजस्वी वर्णन करते हुए बताया कि हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष के अत्याचारों से समस्त देवगण त्राहिमाम कर उठे थे।
पृथ्वी को समुद्र के रसातल में डुबो देने पर भगवान नारायण ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा की और राक्षस का अंत किया।
हिरण्याक्ष के वध के पश्चात उसके पुत्र अंधकासुर ने प्रभु से प्रतिशोध की भावना से भगवान शिव की कठोर तपस्या की।
तप से प्रसन्न होकर शिव ने उसे त्रैलोक्य विजय का वरदान दिया, पर साथ ही चेताया कि अन्याय और अत्याचार का मार्ग अपनाने पर उसका विनाश निश्चित होगा।
वरदान पाकर अंधकासुर अहंकार में डूब गया और देवताओं, मनुष्यों, गंधर्वों सहित समस्त सृष्टि पर अत्याचार करने लगा। इंद्र सहित सभी देवगण भयभीत होकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे।
तब सृष्टि को भयमुक्त करने के लिए भगवान शिव ने भैरव अवतार धारण किया।
भैरव के प्रचंड रूप को देखकर अंधकासुर कांप उठा।
वह अपने स्थान से हिल भी न सका और अंततः
प्रभु के चरणों में गिरकर अपने कर्मों पर पश्चाताप करते हुए क्षमा याचना की।
वसंत विजयानंद गिरी महाराज की पूर्व उद्घोषणा के अनुसार, कथा पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपने घरों पर परिजनों को फोन कर सतर्क किया।
अचानक अनेक श्रद्धालुओं के फोन बज उठे।
किसी ने वीडियो कॉल तो किसी ने फोटो भेजकर बताया कि घरों के देवस्थान पर कुमकुम, जल, केसर के छींटे पड़े।
गुरुदेव ने इसे घरों से नकारात्मक ऊर्जा के नाश
और सकारात्मक शक्ति के प्रवेश का संकेत बताया।
किसी के खाली पर्स में सिक्के आए, तो किसी को दिव्य सुगंध का अनुभव हुआ।
🔱 गुरुवार: अभिष्ट मंत्रोच्चार के साथ दिव्य भैरव दर्शन
🏺 रविवार: पाली नगर की सुख-समृद्धि हेतु विशाल कलश यात्रा














