5 साल में सिस्टम फेल: वेराराम पूरा बदहाल

गंदगी-जलभराव में कैद जिंदगी, ग्रामीणों का सवाल—“क्या हम इंसान नहीं?”
( रिपोर्ट – पुखराज कुमावत )
सुमेरपुर/शिवगंज, सिरोही
देश और प्रदेश में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सिरोही जिले का वेराराम पूरा गांव उन दावों की जमीनी सच्चाई को बेनकाब करता नजर आ रहा है। यहां हालात इतने बदतर हैं कि तस्वीरें ही सब कुछ कह देती हैं—कीचड़, गंदा पानी, टूटी सड़कें और बदहाल जीवन।
तस्वीरों की जुबानी हकीकत
इन फोटो में साफ दिख रहा है—
- पानी की टंकी के आसपास गंदगी का अंबार
महिलाएं उसी कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से होकर पानी भरने को मजबूर हैं। टंकी के पास जमा सड़ा हुआ पानी संक्रमण का बड़ा खतरा बन चुका है। - गलियां नहीं, गंदे तालाब
सड़कों पर भरा काला पानी, जिसमें घरों की परछाई तक दिख रही है—ये कोई तालाब नहीं, बल्कि गांव की मुख्य गलियां हैं। - निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप
नालियां जाम हैं या बनी ही नहीं। गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और वहीं सड़ रहा है। - हर कदम पर खतरा
कीचड़, फिसलन और गड्ढों के बीच चलना भी जोखिम भरा है—खासतौर पर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए।

पानी की टंकी: राहत नहीं, संकट का केंद्र
जिस पानी की टंकी से गांव को राहत मिलनी चाहिए, वही आज परेशानी का कारण बन गई है।
चारों तरफ फैली गंदगी और बदबू के बीच महिलाएं पानी भरने को मजबूर हैं।
हर दिन फिसलने, चोट लगने और संक्रमण का खतरा बना रहता है।
“गांव नहीं, बीमारी का घर बन गया है”
ग्रामीणों का साफ कहना है—
“यहां अब रहना मजबूरी है, हर वक्त बीमारी का डर बना रहता है।”
गंदा पानी, मच्छर और बदबू मिलकर गांव को बीमारी का अड्डा बना रहे हैं।
डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
वोट के बाद गायब जनप्रतिनिधि
गांव के लोगों का आरोप है—
- चुनाव के समय नेता हर घर तक पहुंचे
- वादों की लंबी लिस्ट दी गई
- लेकिन जीत के बाद कोई लौटकर नहीं आया
“वोट लेने के बाद किसी ने मुड़कर नहीं देखा”
यह सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि पूरे गांव की एकजुट आवाज है।
“5 साल में एक ईंट तक नहीं”
ग्राम पंचायत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
- न सड़क बनी
- न नालियां
- न सफाई की कोई स्थायी व्यवस्था
विकास सिर्फ फाइलों और कागजों में दिख रहा है, जमीन पर नहीं।

सत्ता से सीधे सवाल
ग्रामीण देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi और प्रदेश के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma से पूछ रहे हैं—
“जब हर जगह विकास हो रहा है, तो हमारा गांव इस बदहाली में क्यों जी रहा है?”
यह सवाल सिर्फ वेराराम पूरा का नहीं, बल्कि उन हजारों गांवों का है जो अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
“सिस्टम एसी में, जनता गंदगी में”
ग्रामीणों का गुस्सा साफ झलक रहा है—
- अधिकारी और जनप्रतिनिधि आराम में
- जनता गंदगी में जिंदगी काटने को मजबूर
महिलाओं और युवाओं में खासा आक्रोश है, जो अब खुलकर सामने आ रहा है।

कार्रवाई या खानापूर्ति?
ग्रामीणों के मुताबिक—
- शिकायत के बाद कुछ जगहों पर बजरी डाल दी गई
- लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है
यानी समाधान नहीं, सिर्फ दिखावा किया गया।
अब आंदोलन की तैयारी
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है—
“अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा”
यह चेतावनी प्रशासन के लिए एक साफ संकेत है कि अब सब्र खत्म हो रहा है।
यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं
वेराराम पूरा की ये तस्वीरें और हालात सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं हैं।
यह उस व्यवस्था का आईना है जहां—
- दावे बड़े हैं
- लेकिन जमीनी हकीकत बेहद कमजोर
अब सवाल सीधा है—
क्या जिम्मेदार लोग जागेंगे, या यह आक्रोश किसी बड़े जनआंदोलन में बदलेगा?













