Parle-G की ऐतिहासिक फैक्ट्री का पुनर्विकास: एक युग की यादें, लेकिन पूरी कहानी क्या है?

Narayan Lal Gurjar
Parle-G की ऐतिहासिक फैक्ट्री का पुनर्विकास
एक युग की यादें, लेकिन पूरी सच्चाई क्या है?
✍️ Narayan Lal Gurjar
Special Ground Report | Mumbai
भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां कभी Parle-G बिस्किट न खाया गया हो।
यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि पीढ़ियों की साझा स्मृति है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि
“Parle-G फैक्ट्री बंद हो गई”, जिसने लोगों को भावुक कर दिया।
लेकिन खबर का पूरा सच जानना जरूरी है।
विले पार्ले फैक्ट्री: असल स्थिति
मुंबई के विले पार्ले ईस्ट में स्थित Parle Products की ऐतिहासिक फैक्ट्री
में Parle-G बिस्किट का उत्पादन वर्ष 2016 में ही बंद कर दिया गया था।
यह फैसला अचानक नहीं था, बल्कि उत्पादन क्षमता और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग
आवश्यकताओं के कारण लिया गया था।
2026 में पुनर्विकास को मिली मंजूरी
7 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन
प्राधिकरण (SEIAA) ने इस परिसर के पुनर्विकास को पर्यावरणीय मंजूरी दी।
लगभग 54,438 वर्ग मीटर (13.5 एकड़) क्षेत्र में फैली इस जमीन
पर अब एक बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट प्रस्तावित है।
- 21 पुरानी इमारतों को गिराने की अनुमति
- ऑफिस स्पेस और कमर्शियल यूनिट्स
- आधुनिक पार्किंग और इंफ्रास्ट्रक्चर
Parle-G की ऐतिहासिक यात्रा
Parle Products की स्थापना 1929 में हुई थी।
1939 में बिस्किट निर्माण शुरू हुआ और Parle-G ने धीरे-धीरे
पूरे देश में अपनी मजबूत पहचान बना ली।
सस्ता, पौष्टिक और भरोसेमंद होने के कारण यह हर वर्ग तक पहुंचा।
पैकेट पर बनी बच्ची का सच
Parle-G पैकेट पर बनी बच्ची किसी वास्तविक व्यक्ति की तस्वीर नहीं है।
यह 1960 के दशक में एक कलाकार द्वारा डिजाइन किया गया चित्र है,
जो मासूमियत, शुद्धता और भरोसे का प्रतीक बन गया।
विले पार्ले की फैक्ट्री का पुनर्विकास एक युग के अंत जैसा जरूर लगता है,
लेकिन यह Parle-G के अंत की कहानी नहीं है।
फैक्ट्री इतिहास बन रही है,
पर Parle-G आज भी करोड़ों भारतीय घरों का हिस्सा है
और आगे भी रहेगा।
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