श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ 52 जिनालय की 39वीं वर्षगांठ हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

भायंदर पश्चिम। श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन देरासर स्थित 52 जिनालय की 39वीं वर्षगांठ सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान के जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम आचार्य गुरुभगवंत सूर्योदय सागर सूरीश्वरजी, युग दिवाकर आचार्य धर्म सूरीश्वरजी, शासन रत्न आचार्य राजरत्न सूरीश्वरजी, परमपूज्य रश्मिरत्न सूरीश्वरजी, आचार्य हितरत्न सूरीश्वरजी एवं आचार्य अक्षयरत्न सूरीश्वरजी आदि गुरुभगवंतों की पुण्य निश्रा में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान एवं 51 देहरियों में विराजमान परमात्माओं का भव्य ध्वजारोहण किया गया। प्रत्येक देहरी में तीन-तीन परमात्मा विराजमान हैं। ध्वजारोहण के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए स्वामीवात्सल्य (भोजन प्रसादी) का आयोजन रखा गया।

मंदिर की विशेषता के रूप में यहां समय-समय पर चमत्कारों की अनुभूति भी श्रद्धालुओं को होती रही है। रात्रि के समय घुंघरुओं की मधुर ध्वनि और दिव्य संगीत सुनाई देने की बातें भक्तों द्वारा बताई जाती हैं। एक प्रसंग में चोरी की नीयत से मंदिर में घुसे व्यक्ति के भगवान से प्रार्थना करने पर उसे क्षमा प्राप्त हुई और उसने जीवन में कभी चोरी न करने का संकल्प लिया।
मंदिर के भूयार में विराजमान आदिनाथ भगवान पर जलधारा प्रकट होने की घटना भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। शिखर पर विराजमान मुनिसुव्रत स्वामी भगवान के दर्शन से शनि दोष में राहत मिलने की मान्यता भी प्रचलित है।
इतिहास के अनुसार, यह स्थान पूर्व में खाड़ी क्षेत्र होने के कारण अस्थिर था, जिससे मंदिर को नुकसान होने की आशंका बनी रहती थी। किंतु गुरुभगवंतों की तपस्या और अभिमंत्रित वासक्षेप के प्रभाव से आज तक मंदिर सुरक्षित और निर्विघ्न बना हुआ है।
श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन संघ से अब तक 250 से अधिक दीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी हैं। साथ ही, प्रत्येक पोष दशमी पर यहां अष्टम की आराधना एवं विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं।














