इच्छा पर नियंत्रण जीवन में सुख का वास्तविक आधार-भव्य दर्शन

Goutam Surana
कंवलियास रावला चोक में आयोजित धर्मसभा में सेकड़ो की संख्या में मोजूद आमजन के बीच भव्य दर्शन मुनि ने कहा की मनुष्य का जीवन इच्छाओं से भरा हुआ है। इच्छा स्वाभाविक है, परंतु अनियंत्रित इच्छा ही दुःख का कारण बनती है। आज संसार में अधिकांश लोग यह मान बैठे हैं कि सुख का आधार केवल धन, वैभव और भौतिक साधन हैं। लेकिन यदि धन ही सुख देता, तो संसार के सबसे धनी लोग कभी दुखी न होते।
वास्तविकता यह है कि सुख बाहर की वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की स्थिति में होता है।जैसे अग्नि में घी डालने से अग्नि और बढ़ती है, वैसे ही इच्छाओं की पूर्ति से इच्छाएँ समाप्त नहीं होतीं, बल्कि और बढ़ जाती हैं। एक इच्छा पूरी होती है, दूसरी खड़ी हो जाती है। मनुष्य जीवनभर भागता रहता है, फिर भी संतोष नहीं मिलता।धन आवश्यक है, क्योंकि उससे जीवन की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।
परंतु धन को ही जीवन का लक्ष्य बना लेना भूल है। धन से घर खरीदा जा सकता है, लेकिन परिवार का प्रेम नहीं। महँगा बिस्तर खरीदा जा सकता है, लेकिन नींद नहीं। दवाइयाँ खरीदी जा सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य नहीं।आज हम देखते हैं कि अनेक संपन्न लोग तनाव, भय, अकेलेपन और असंतोष से घिरे रहते हैं। दूसरी ओर, सीमित साधनों में भी संतोषी व्यक्ति प्रसन्न रहता है।
इसका कारण है — सुख का संबंध वस्तुओं से कम और मन की संतुष्टि से अधिक है।भारतीय संस्कृति में संतोष को महान संपत्ति कहा गया है। जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना सीख लेता है, वही सच्चा सुख अनुभव करता है।जीवन का सच्चा सुख धन के ढेर में नहीं, बल्कि शांत और संतुष्ट मन में है। इच्छाओं का दास बनने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता। जो व्यक्ति इच्छाओं पर नियंत्रण रखता है, वही स्वतंत्र और आनंदित जीवन जीता है।











