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पदमश्री आचार्य नित्यानंदसुरिश्वर का कंवलियास के सुसवानी माता मंदिर में भव्य मंगल प्रवेश

Goutam Surana
Reporter
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कंवलियास केसरिया धाम पर पांच दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न कर आज पदम श्री सम्मान प्राप्त आचार्य नित्यानंद सुरिश्वर जी महाराज साहब बिहार करके हाईवे स्थित श्री के सुसवानी माता मंदिर पहुंचे जहां पर उनका भव्य अभिनंदन किया गया ढोल नगाड़ों की मधुर लय के बीच मांगलिक प्रवेश हुआ इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि राम प्रसाद कुमावत भाजपा के भगवत सिंह राठौड़ ट्रस्ट मंत्री गौतम सुराणा सीए सुनील सुराणा, ट्रस्टी सुरेंद्र सुराणा महेंद्र प्रजापत सुमित गोखरू सहित भीलवाड़ा ब्यावर विजयनगर सूरत आदि के क्षेत्र की सहित सैकड़ो की संख्या में भक्त जन मौजूद थे.

विश्व शान्ति और मानव कल्याण ही जीवन का लक्ष्य – पदम् श्री आचार्य नित्यानंद सुरिश्वर
पूज्य आचार्यश्री ने समस्त भारत में 2 लाख KM से अधिक विहार करके मानव सेवा के कई अद्भुत कार्य किए हैं.पूज्य आचार्यश्री ने मात्र 9 वर्ष की उम्र में दीक्षा ली थी और 35 वर्ष की उम्र में आचार्य के पद पर विराजमान हुए थे.
पंजाब के लुधियाना में जन्मे आचार्य नित्यानंद ने केवल सात साल की उम्र में दीक्षा लेकर अपने जीवन को समाज और मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था. वर्ष 2001 में उन्होंने बिहार के जमुई जिले के लछुआड़ से सेवा कार्यों की शुरुआत की. वहां उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति सुधारने का बीड़ा उठाया और कई विकास कार्य करवाए. उनकी प्रेरणा से 2006 में भगवान महावीर अस्पताल की स्थापना हुई, जो आज 125 बेड का आधुनिक अस्पताल बन चुका है. खासतौर पर नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में इस अस्पताल ने देशभर में पहचान बनाई है और 18 सालों में यहां 40 हजार से अधिक आंखों के सफल ऑपरेशन हो चुके हैं है. 78 वर्षीय जैन आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर महाराज, जिन्हें देशभर में राष्ट्र संत के रूप में जाना जाता है, को उनके लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए पिछले दिनों पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था

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गरीबों और महिलाओं के लिए कर रहे विशेष प्रयास
गरीबों और वंचितों को सस्ती चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आचार्य नित्यानंद ने अस्पताल में मात्र 20 रुपये में पंजीकरण और 100 रुपये में रहने की सुविधा सुनिश्चित कराई. इसके अलावा उन्होंने महिला सशक्तिकरण और रोजगार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए. उनकी प्रेरणा से सिलाई केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए गए, जहां महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. श्री आत्म वल्लभ जैन कल्याण ट्रस्ट के माध्यम से उनकी सेवाएं लगातार जारी हैं और समाज के विभिन्न वर्गों को इनसे सीधा लाभ मिल रहा है. पूज्य आचार्यश्री ने अभी तक लगभग 500 से अधिक मंदिरों-तीर्थों की अंजनशलाका प्रतिष्ठा और स्थापना की है और 30 से अधिक Books का लेखन-संपादन किया है पूज्यश्री की निश्रा में शारदा यूनिवर्सिटी में 1200 बेड के अस्पताल का शुभारम्भ हुआ.

न्यूज़ डेस्क

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