पाली कलेक्टर की एक अपील ने छेड़ दी जनजागरण की लहर, ‘आओ गांव चलें’ अभियान बना भावनाओं और विकास का आंदोलन

Pukhraj Kumawat
“जिस मिट्टी ने आपको बनाया, अब उसका कर्ज चुकाइए…”
- पाली।
सरकारी पत्र कम ही लोगों के दिलों तक पहुंच पाते हैं, लेकिन पाली जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी की एक भावुक अपील ने हजारों लोगों के मन को झकझोर दिया है। “आओ गांव चलें” अभियान के तहत जारी इस संदेश ने प्रवासी पालीवासियों में अपनी मिट्टी, अपने गांव और अपने संस्कारों के प्रति नई जिम्मेदारी का भाव जगा दिया है।
कलेक्टर गोस्वामी ने बेहद भावुक शब्दों में लिखा कि “आप चाहे दुनिया के किसी भी कोने में बस गए हों, लेकिन आपकी जड़ें आज भी पाली की उसी मिट्टी से जुड़ी हैं, जिसने आपको पहचान दी, संस्कार दिए और आगे बढ़ने की ताकत दी। अब वक्त है उस मिट्टी का ऋण चुकाने का।”
यही एक पंक्ति अब जिलेभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर गांवों की चौपालों तक इस अभियान की गूंज सुनाई दे रही है। लोग इसे केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि से भावनात्मक जुड़ाव का आंदोलन बता रहे हैं।

अभियान के तहत प्रवासी नागरिकों से अपने गांवों के सरकारी स्कूलों में कक्षा-कक्ष निर्माण, विद्यार्थियों के लिए स्टडी डेस्क उपलब्ध करवाने, आंगनबाड़ी केंद्रों को सुविधायुक्त बनाने, स्वास्थ्य केंद्रों में नए कमरे बनवाने, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में सहयोग की अपील की गई है। खास बात यह है कि प्रशासन ने लोगों से नकद राशि नहीं, बल्कि सीधे निर्माण और विकास कार्यों में भागीदारी का आह्वान किया है।
कलेक्टर ने कहा कि जब कोई प्रवासी अपने गांव के स्कूल में एक कमरा बनवाएगा, किसी बच्चे के लिए स्टडी डेस्क उपलब्ध करवाएगा या गांव में पानी बचाने का काम करेगा, तब वह केवल निर्माण नहीं करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारने का पुण्य कार्य करेगा।
अभियान को लेकर भामाशाहों, सामाजिक संगठनों और प्रवासी पालीवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कई लोगों ने अपने गांवों में स्कूल और आंगनबाड़ी विकास के लिए सहयोग देने की इच्छा जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद किसी प्रशासनिक पहल ने लोगों की भावनाओं को इतनी गहराई से छुआ है। “आओ गांव चलें” अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि गांव, संस्कार और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य निभाने की नई सोच बनता जा रहा है।











