पाली में संक्रांति महोत्सव: आचार्य श्री विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वर जी के सानिध्य में भव्य महा मांगलिक संपन्न

पाली। संक्रांति के पावन अवसर पर अविघ्न ईस्टेट में आयोजित श्रीमद् विजय धर्मधुरंधरजी संक्रांति महोत्सव एवं महा मांगलिक श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। यह भव्य आयोजन श्री निर्मला देवी मोहनलाल जी तलेसरा परिवार, पाली द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य गच्छाधिपति श्रुतभास्कर आचार्य श्री विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वर महाराज के मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर पूज्य पंजाब केसरी गुरुदेव आचार्य श्री विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज की प्रतिकृति पर माल्यार्पण एवं गुरु पूजन तलेसरा परिवार द्वारा किया गया।
संगीतमय वातावरण में अभिषेक परमार द्वारा सामूहिक गुरु वंदन प्रस्तुत की गई। वहीं पद्म कुमार जैन एवं राजेंद्र बागरेचा ने भक्ति गीतों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्री आत्म वल्लभ सेवा मंडल, सादड़ी-राणकपुर की ओर से जयंतीलाल रांका, मोहनलाल जैन (बिजोवा), केवलचंद जी बेलापुर, मोहनलाल जी लुणावा सहित अन्य भक्तों ने भजन प्रस्तुत किए।

प्रवचन श्रृंखला में साध्वी श्री प्रशमरत्ना जी म.सा एवं साध्वी श्री रींमरत्ना जी म.सा ने युवाओं को धर्म संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा दी। मुनि श्री विश्वेंद्र विजय जी म.सा ने जीवन को अंतर्मुखी बनाकर सुधारने का संदेश दिया, जबकि गणी श्री धर्मरत्न विजय जी म.सा ने जिन धर्म के पालन पर जोर दिया।
पुणे से आए प्रोफेसर कमल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि “धर्म” और “धुरंधर” केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और उत्थान के माध्यम हैं। उन्होंने भावपूर्ण पंक्तियों के माध्यम से गुरु भक्ति की गहराई को व्यक्त किया।
इस अवसर पर सोमवार पेठ जैन संघ, पुणे के अध्यक्ष तेजराज सोलंकी ने वर्षीतप पारणा एवं आगामी संक्रांति महोत्सव के लिए आमंत्रण दिया। वहीं पूज्य गुरुदेव ने पालीताणा में चातुर्मास प्रवेश हेतु 20 जुलाई 2026 की तिथि घोषित की।
चिंतक मोहनलाल लुणावा ने गुरु रत्नाकर सूरी जी के सपनों को साकार करने का आह्वान करते हुए अंबाला में बन रहे 108 महापुरुषों के चैत्यालय के निर्माण में सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान लाभार्थी तलेसरा परिवार की ओर से भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई तथा अविघ्न ईस्टेट जैन संघ द्वारा गुरुदेव सहित साधु-साध्वी वृंद का सम्मान कामली ओढ़ाकर किया गया। बीकानेर से आए विजय कुमार कोचर ने संक्रांति भजन प्रस्तुत किया।
अंत में पूज्य आचार्य श्री विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वर जी महाराज ने अपने प्रवचन में पूर्वाचार्यों की प्रेरणादायक कथाओं का उल्लेख करते हुए धर्म सेवा और गुरु भक्ति को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने संक्रांति के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समय आत्मचिंतन और नव आरंभ का प्रतीक है।
भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से परिपूर्ण इस आयोजन का समापन मंगलभावनाओं के साथ हुआ।
















