वरकाणा विद्यार्थी स्नेह मिलन समारोह:एक मिलन नहीं, समाज निर्माण की मानकचंद राठौड़ की मजबूत पहल

- भायंदर / बाली
रविवार, 22 मार्च को गोरेगांव स्थित सरदार वल्लभभाई हॉल में आयोजित वरकाणा विद्यार्थी स्नेह मिलन समारोह केवल एक औपचारिक मिलन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह सामाजिक एकता, सेवा भावना और शिक्षण सहयोग की दिशा में एक ठोस और प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आया। लगभग 300 पूर्व विद्यार्थियों सहित 200 महिलाओ और अन्य की गरिमामयी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि भावना सच्ची हो तो वर्षों पुराना संबंध भी उसी आत्मीयता के साथ फिर से जीवंत हो सकता है।इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही – दोस्ती, सद्भाव और सेवा का संगम, और इस संगम को एक सकारात्मक दिशा देने का श्रेय जाता है समाजसेवी मानकचंद राठौड़ को, जिन्होंने समाज में शिक्षा सेवा के उद्देश्य से एक नए ट्रस्ट की स्थापना का विचार सामने रखा।माणक राठौड़ ने अपने संबोधन में बताया कि संस्था का लक्ष्य 11 लाख रुपये सहयोग राशि के साथ 108 ट्रस्ट कमेटी सदस्यों को जोड़ने का रखा गया है तथा प्रारंभिक रूप से 9 ट्रस्टियों से संस्था के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसी मंच से 11 ट्रस्टियों के नाम सहमति के साथ प्राप्त हो गए, जो इस विचार के प्रति समाज के विश्वास को दर्शाता है।मंच से यह भी स्पष्ट किया गया कि एकत्रित निधि को राष्ट्रीयकृत बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा तथा उसके ब्याज से समाज के जरूरतमंद विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
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साथ ही यह भी तय किया गया कि अलग से सम्मेलन लाभार्थियों के सहयोग से प्रतिवर्ष पूर्व विद्यार्थियों का स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में आगामी दो सम्मेलनों के लाभार्थियों के नाम भी तय हो जाना इस आयोजन की सफलता का प्रमाण है।कार्यक्रम के लाभार्थी पूर्व विद्यार्थी उत्तम जी एवं उनकी धर्मपत्नी चंचल जी (पालड़ी) रहे। मुख्य अतिथि के रूप में वरकाणा विद्यालय के उपाध्यक्ष चांदमल हिंगड़, भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष ख्याति लालजी तातेड़,कवि युगराज जैन तथा शांतिनाथ जैन देरासर दादर के अध्यक्ष विजय राज परमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।इस सफल आयोजन के पीछे ताराचंद छाजेड़ और उगमराज मेहता सहित पूरी टीम का समर्पित प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कुल मिलाकर मानकचंद राठौड़ के नेतृत्व में उनकी टीम ने तन, मन और धन से समाज सेवा का जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह वास्तव में सराहनीय और अनुकरणीय है।














