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भायंदर के पास बनेगा श्री महावीर वृद्धाश्रम का भूमिपूजन संपन्न

जेठमल राठौड़
रिपोर्टर

जेठमल राठौड़, रिपोर्टर - मुंबई / बाली 

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दीपक जैन

मानव सेवा सबसे बड़ी सेवा: वज्रतिलक विजयजी


भायंदर :- वृद्धाश्रम प्रणेता. गुरुराम-अभय शिशु परम पूज्य गणिवर्य जिनरत्नविजयजी म.सा.की प्रेरणा से व श्री वज्रतिलक विजयजी म.सा.की निश्रा में बनने जा रहे श्री महावीर वृद्धाश्रम का भूमिपूजन संपन्न हुआ।
भायंदर(वेस्ट) के उत्तन रोड पर श्री महावीर वृद्धाश्रम का निर्माण जिनभक्ति मानव सेवा आश्रम ट्रस्ट (मुंबई) गोल्डन स्टार फाउंडेशन (मीरा भाईंदर) द्वारा किया जा रहा हैं।इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा कि मानव सेवा जीवन की श्रेष्ठ सेवा हैं।उन्होंने कहा कि मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म सेवा है। “मानव सेवा श्रेष्ठ सेवा” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है। जिस प्रकार वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते, नदियाँ अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी दूसरों के कल्याण के लिए होना चाहिए।

गुरुदेव ने कहा कि सेवा का अर्थ केवल धन या वस्तु देना नहीं है। किसी दुखी को सांत्वना देना, बीमार की तीमारदारी करना, भूखे को भोजन देना, अनपढ़ को शिक्षा देना, और गिरे हुए को उठाना – ये सभी सेवा के रूप हैं। निस्वार्थ भाव से किया गया हर छोटा कार्य भी सेवा कहलाता है।सेवा इसलिए श्रेष्ठ है कि आत्मिक संतोष दूसरों की मदद करने से जो सुख मिलता है वह किसी भौतिक वस्तु से नहीं मिल सकता। समाज का कल्याण जब हम एक-दूसरे की मदद करते हैं, तब एक सशक्त और संवेदनशील समाज का निर्माण होता है।

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ईश्वर की सच्ची पूजा के धर्मों ने कहा है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। गरीब, असहाय और पीड़ित में ही ईश्वर का वास होता है।महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, बाबा आमटे जैसे महान लोगों ने अपना पूरा जीवन मानव सेवा को समर्पित कर दिया। उन्होंने सिद्ध किया कि सेवा के लिए बड़े साधनों की नहीं, बड़े मन की जरूरत होती है।आज के स्वार्थी युग में मानव सेवा की भावना कम होती जा रही है। हमें अपने बच्चों में बचपन से ही सेवा के संस्कार डालने चाहिए। रक्तदान, नेत्रदान, शिक्षा दान, या अपने समय का दान – हम किसी भी रूप में सेवा कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि याद रखें, मरने के बाद हमारे साथ केवल हमारे कर्म जाते हैं। पद, पैसा, प्रतिष्ठा सब यहीं रह जाता है। इसलिए जीवन रहते जितना हो सके मानव सेवा करें। क्योंकि सचमुच, मानव सेवा ही श्रेष्ठ सेवा है।

इस अवसर पर किशोर गोसलीया, अरुणजी( दादर), जयंतीभाई जैन चेंबूर, प्रकाश जैन,कोरटा तीर्थ के ट्रस्टी किरण मेहता अंधेरी, नवीन R गाला दादर बाबूभाई भगवानजी दादर, कोरटा तीर्थ ट्रस्टी दिलीप पुनमिया भैरव ,चंपालालजी जैन , दीपक जैन राजन भोसले,मुकेश भाई दर्शन आदि कई गणमान्य उपस्थित थे।

अधिक जानकारी के लिए OFFICE: 9967821921,महेंद्र जैन,किशोर गोसलिया 9323979387 से संपर्क करे।D

न्यूज़ डेस्क

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