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पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में आज भी सक्रिय नवीन कुमार

राष्ट्रीय स्तर पर हिदी पत्रकारिता और साहित्य के ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व

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जेठमल राठौड़
रिपोर्टर

जेठमल राठौड़, रिपोर्टर - मुंबई / बाली 

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कर्म, संवेदना और सृजन का नाम : नवीन कुमार

हिंदी पत्रकारिता और साहित्य की दुनिया में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो अपनी पहचान किसी प्रचार या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि अपने निरंतर कर्म, सादगी और संवेदनशील अभिव्यक्ति से बनाते हैं। नवीन कुमार ऐसे ही सृजनशील व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। चार दशक के करीब फैले उनके रचनात्मक और पत्रकारिता जीवन में समाज, मनुष्य और समय की गहरी समझ दिखाई देती है।

नवीन कुमार का जन्म वर्ष 1962 में बिहार के खगड़िया जिले में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और स्नातक तक की पढ़ाई बिहार में ही हुई। बचपन से ही साहित्य के प्रति उनका गहरा लगाव रहा। कविताएँ लिखने का शौक था और इस रुचि को उनके पिता का निरंतर प्रोत्साहन मिला। विद्यालय और महाविद्यालय के हिंदी शिक्षकों के सान्निध्य ने उनकी साहित्यिक दृष्टि को परिष्कृत और सुदृढ़ बनाया।

उनकी कविताएँ प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं ‘दृष्टि’ और ‘अवकाश’ में प्रकाशित हुईं। बाद में प्रसिद्ध पत्रिका ‘सारिका’ के संपादक अवध नारायण मुद्गल द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के नवोदित साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के अभियान के दौरान उनकी लघुकथाओं को भी स्थान मिला। यह उनके साहित्यिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक थी।

नवीन कुमार का मानना है कि “अनुभवों की शाब्दिक अभिव्यक्ति ही साहित्य है।” यही कारण है कि उनकी रचनाओं में जीवन के विविध रंग, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाएँ स्वाभाविक रूप से उपस्थित दिखाई देती हैं।

जयप्रकाश आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने साहित्य के साथ-साथ पत्रकारिता की ओर भी कदम बढ़ाए। हालांकि वे किसी वैचारिक कट्टरता से नहीं जुड़े, बल्कि समाज और जनजीवन की वास्तविकताओं को समझने और अभिव्यक्त करने को अपना उद्देश्य बनाया। उन्होंने आंचलिक पत्रकारिता से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की और बाद में देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों से जुड़े।

मुंबई आगमन उनके पत्रकारिता जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। यहाँ उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। हिंदी के लिए स्वतंत्र लेखन किया तथा सिनेमा जगत की चकाचौंध और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक पक्षों पर स्तंभकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। पत्रकारिता में उनकी निष्पक्षता, संवेदनशील रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण क्षमता के कारण उन्हें अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। अपने संस्थान से प्राप्त “सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर” का सम्मान उनके पत्रकारिता जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धियों में गिना जाता है।

साढ़े तीन दशक से अधिक समय तक सक्रिय पत्रकारिता करने के बाद कोरोना काल ने उन्हें एक बार फिर साहित्य की ओर लौटने का अवसर दिया। इसी कालखंड में उनकी रचनात्मक ऊर्जा नए रूप में सामने आई और उनकी दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हुईं।

उनकी पहली पुस्तक ‘वेश्या की बेटी’ एक कहानी-संग्रह है, जिसमें 25 कहानियाँ संकलित हैं। इस संग्रह की प्रस्तावना प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने लिखी है। उन्होंने नवीन कुमार को विषय चयन के प्रति अत्यंत संवेदनशील कहानीकार बताते हुए लिखा कि ‘वेश्या की बेटी’, ‘जीवन बाबू’, ‘सालगिरह’, ‘सुमेधा की जिद’, ‘रंगभेद’ और ‘बंद कर दो दरवाजा’ जैसी कहानियाँ पाठकों को गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करती हैं। यह संग्रह समाज के हाशिए पर खड़े लोगों की पीड़ा, संघर्ष और मानवीय गरिमा को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है।

उनकी दूसरी पुस्तक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समकालीन राष्ट्रीय घटनाओं पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है। यह पुस्तक पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और भारतीय सैन्य बलों द्वारा आतंकवाद तथा उसके संरक्षकों के विरुद्ध चलाए गए अभियान का विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करती है। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना, साहस, सुरक्षा चेतना और राष्ट्रीय एकता का भी सशक्त आख्यान है।

दोनों पुस्तकों का प्रकाशन न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन द्वारा किया गया है और इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पाठकों की सराहना प्राप्त हुई है। इन कृतियों ने नवीन कुमार को एक ऐसे लेखक के रूप में स्थापित किया है जो पत्रकारिता के अनुभवों को साहित्यिक संवेदनाओं के साथ अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।

नवीन कुमार का जीवन इस बात का प्रमाण है कि पत्रकारिता और साहित्य दो अलग-अलग धाराएँ नहीं, बल्कि समाज और मनुष्य को समझने की एक ही प्रक्रिया के दो आयाम हैं। पत्रकारिता उन्हें तथ्य देती है, जबकि साहित्य उन तथ्यों के भीतर छिपी संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देता है।

आज जब पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही अनेक चुनौतियों के दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में नवीन कुमार जैसे रचनाकार अपने कर्म, प्रतिबद्धता और संवेदनशील लेखन के माध्यम से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। उनका लेखन हमें यह विश्वास दिलाता है कि शब्दों की शक्ति आज भी समाज को सोचने, समझने और बदलने की क्षमता रखती है।

नवीन कुमार केवल एक पत्रकार या साहित्यकार नहीं, बल्कि अनुभवों को शब्दों में ढालकर समय का दस्तावेज तैयार करने वाले सजग और संवेदनशील सृजनकर्ता हैं।

Khushal Luniya

Meet Khushal Luniya – A Young Tech Enthusiast, AI Operations Expert, Graphic Designer, and Desk Editor at Luniya Times News. Known for his Brilliance and Creativity, Khushal Luniya has already mastered HTML and CSS. His deep passion for Coding, Artificial Intelligence, and Design is driving him to create impactful Digital Experiences. With a unique blend of technical skill and artistic vision, Khushal Luniya is truly a rising star in the Tech and Media World.

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