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रात में जारी अवैध शराब बिक्री, प्रशासन पर उठे सवाल

तहसील रोड समेत कई स्थानों पर रात 12 बजे तक पीछे के शटर से शराब बेचे जाने की बातें सामने आ रही हैं। यह अवैध शराब बिक्री यदि लापरवाही है तो चिंताजनक है, और यदि अवैध शराब बिक्री मिलीभगत है तो मामला और गंभीर बन जाता है।


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  • रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर 

सुमेरपुर। मंचों से सख्ती के दावे, बैठकों में कानून व्यवस्था के बड़े-बड़े भाषण… लेकिन जमीनी हकीकत सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा मार रही है। शहर में रात 8 बजे के बाद शराब बिक्री पर प्रतिबंध सिर्फ फाइलों में जिंदा है, जबकि गलियों और चौराहों पर अवैध शराब का कारोबार बेखौफ दौड़ रहा है।

🔥 दो-दो थाने, ऊपर से आबकारी… फिर भी खुली बिक्री!

शहर में दो पुलिस थाने और अलग से आबकारी तंत्र मौजूद है। इसके बावजूद रात ढलते ही आधे शटर के पीछे और कई जगह खुलेआम शराब बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सवाल सीधा है—क्या सिस्टम सो रहा है या फिर सब कुछ देखकर भी आंखें मूंद ली गई हैं?

जब आम नागरिक तक को पता है कि किस गली में रात के अंधेरे में शराब मिलती है, तो खुफिया तंत्र की चुप्पी खुद बहुत कुछ बयान कर रही है। अगर यह नाकामी है तो बेहद शर्मनाक है, और अगर यह मिलीभगत है तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।

⚠️ कानून का खौफ खत्म, अवैध धंधा बेपरवाह

  • देर रात तक युवाओं की भीड़
  • हुड़दंग और झगड़ों की आशंका
  • मोहल्लों में बढ़ती असुरक्षा

तहसील रोड सहित कई स्थानों पर आधी रात तक पीछे के शटर से शराब बिकने की चर्चाएं आम हैं। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि कानून को खुली चुनौती है।

🧨 आबकारी विभाग पर भी उठ रहे तीखे सवाल

अवैध शराब पर लगाम कसना जिस विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, उसी के सामने यह कारोबार फल-फूल रहा है। छिटपुट कार्रवाई की खबरें जरूर आती हैं, लेकिन जमीनी असर न के बराबर दिख रहा है। क्या कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?

🎯 जनता का सीधा सवाल — जवाब कौन देगा?

  • क्या रात की गश्त सिर्फ कागजों में हो रही है?
  • क्या शिकायतें दबा दी जाती हैं?
  • क्या जिम्मेदारी तय होगी या मामला यूं ही दबेगा?

सुमेरपुर में कानून व्यवस्था की साख दांव पर है। अगर अभी भी सख्त और दिखने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का भरोसा तंत्र से पूरी तरह उठ सकता है।

🛑 अब नहीं तो कब?
जनता जवाब चाहती है — कानून चलेगा या काला कारोबार?
निगाहें अब जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। सुमेरपुर इंतजार में है… कार्रवाई का, जवाबदेही का और कानून के असली राज का।

 

न्यूज़ डेस्क

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