
अद्भुत, अकल्पनीय आयोजन की अनुमोदना
भूली-बिसरी यादें हुई जीवंत, भूतपूर्व बने अभूतपूर्व
जयजिनेन्द्र, अत्यंत हर्ष, आनंद और उत्साह के साथ श्री पार्श्वनाथ जैन विद्यालय, वरकाणा के भूतपूर्व छात्रों का पहला अभूतपूर्व स्नेह सम्मेलन जवाहर हॉल, गोरेगांव में भव्य रूप से आयोजित हुआ। यह आयोजन न केवल एक मिलन था, बल्कि भावनाओं, स्मृतियों और संस्कारों का अद्वितीय संगम भी था।
इस आयोजन में श्री माणकचंदजी राठौड़, श्री ताराचंदजी छाज़ेड़ और श्री हुक्मचंदजी मेहता द्वारा अथक प्रयासों से सैकड़ों भूतपूर्व छात्रों को जोड़कर एक ऐतिहासिक सम्मेलन को साकार किया गया। इनके प्रयासों की जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी कम है।
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इस सम्मेलन के प्रथम हस्ताक्षर के रूप में लक्ष्मी पुत्र उत्तमचंदजी ने सम्पूर्ण आयोजन का लाभार्थी बनकर अपनी अर्जित संपत्ति का सदुपयोग करते हुए विद्यालय के प्रति अपना कर्तव्य निभाया और सभी के मन में अमिट छाप छोड़ दी।
22 मार्च को आयोजित इस सम्मेलन में अपेक्षा से अधिक भूतपूर्व छात्रों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि विद्यालय के प्रति सभी के मन में कितना गहरा सम्मान और प्रेम है। वर्षों बाद एक-दूसरे से मिलकर छात्रों ने जो भावनाएं व्यक्त कीं, वह दृश्य अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।

सामूहिक सद्भावना, प्रेम और भाईचारे से ओतप्रोत यह आयोजन एक स्वर्णिम अध्याय बन गया है, जो भविष्य में और अधिक प्रेरणा और एकता का प्रतीक बनेगा।
सम्मेलन में संस्था के आजीवन ट्रस्टी हेतु 11 लाख रुपये की राशि प्रदान कर संस्था को नई ऊर्जा प्रदान की गई। इस योगदान के लिए सभी दानवीरों का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में जिन-जिन का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग रहा, उन सभी का विशेष धन्यवाद। साथ ही प्रसार-प्रचार में योगदान देने वाले राजकुमारजी मेहता और रमेशजी मेहता का भी आभार प्रकट किया गया।
लेखक ललित परमार ने इस अवसर पर अपनी अनुपस्थिति पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण वे इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा नहीं बन पाए, जिसका उन्हें जीवनभर अफसोस रहेगा।














