सादड़ी में 60 वर्षों पुरानी परंपरा के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, परिक्रमा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब

सादड़ी। शहर में आयोजित नौ दिवसीय परिक्रमा महोत्सव का समापन रामनवमी के पावन अवसर पर अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। इस अवसर पर बाबा रामदेव एवं माता महाकाली का भव्य वरघोड़ा निकाला गया, जिसने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
भव्य शोभायात्रा ने मोहा मन
वरघोड़ा रामधुन चौक से प्रारंभ होकर आकाशगंगा कॉलोनी, नाई वाड़ा, ईलाजी चौक, बाजार, झुंझारजी चौक, कांच का मंदिर, श्री गणेश चौक, तीर खुनिया, बस स्टैंड, आखरिया चौक और गांछवाड़ा होते हुए बारली स्थित बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुआ।
पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया। बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और आकर्षक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। झांकियां इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहीं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े।

24 घंटे अखंड परिक्रमा का आयोजन
नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ प्रारंभ हुआ यह महोत्सव पूरे नौ दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में चलता रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने 24 घंटे अखंड परिक्रमा की और “रामधुन लागी… गोपाल धुन लागी…” जैसे जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।
देवी-देवताओं की वेशभूषा में शामिल श्रद्धालुओं ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
60 वर्षों से जीवित परंपरा
यह परिक्रमा महोत्सव पिछले लगभग 60 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जो सादड़ी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस आयोजन में सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जो आपसी भाईचारे का संदेश देती है।
आयोजन में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का सहयोग
कार्यक्रम में कमेटी के सदस्य देवाराम, हंसराम हिंगड़, राजू, छगन, पक्का महाराज, ओटा महाराज, भैराराम मेघवाल, गणेश टीकम सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
नगरपालिका प्रतिपक्ष नेता राकेश मेवाड़ा, पार्षद रमेश प्रजापत, रक्तदाता सनातन संगठन के संरक्षक आरपी सिंह मेवाड़ा, महेंद्र गिरी, गोविन्द वैष्णव, धीरेंद्र गिरी, शंकर किशोर भाटी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के दौरान सीआई हनवंत सिंह सोडा के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से सम्पन्न हुआ।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सादड़ी की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं की जीवंतता को भी प्रदर्शित करता है।













