निम्बेश्वर टोल पर ‘टोल तानाशाही’ से भड़का जनाक्रोश! 300 से 1500 पहुंचा पास, भड़के चालक—06 अप्रैल तक नहीं मानी मांगें तो सड़कों पर उतरेंगे हजारों लोग

3 किमी दूरी पर भारी वसूली का आरोप, प्राइवेट वाहनों से भी वसूली शुरू—सांडेराव टैक्सी यूनियन ने प्रशासन को दी सीधी चेतावनी
- रिपोर्ट पुखराज कुमावत सुमेरपुर
सुमेरपुर/सांडेराव | निम्बेश्वर टोल प्लाजा पर अचानक बढ़ाई गई टोल दरों ने स्थानीय लोगों और टैक्सी चालकों में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है। शुक्रवार को ‘समस्त निम्बोरानाथ टैक्सी यूनियन सांडेराव’ के बैनर तले दर्जनों वाहन चालकों ने सांडेराव थाने पहुंचकर थानाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और टोल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
यूनियन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 06 अप्रैल तक बढ़ी हुई दरें वापस नहीं ली गईं, तो क्षेत्रभर के टैक्सी चालक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
300 से 1500 रुपए—5 गुना बढ़ोतरी से मचा बवाल
टैक्सी यूनियन के सदस्यों ने बताया कि पहले टैक्सी पास मात्र 300 रुपये में बनता था और स्थानीय निजी वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। लेकिन अब टोल प्रबंधन ने मनमाने तरीके से टैक्सी पास की दर सीधे 1500 रुपये कर दी है।
इतना ही नहीं, अब प्राइवेट वाहनों पर भी 300 रुपये का शुल्क लागू कर दिया गया है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
3 किलोमीटर दूरी पर ‘जबरन वसूली’ का आरोप
यूनियन का कहना है कि टोल प्लाजा सांडेराव कस्बे से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में स्थानीय लोगों से इतनी भारी राशि वसूलना सरासर अन्याय है।
चालकों ने आरोप लगाया कि यह निर्णय उनकी रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार है और टोल प्रबंधन बिना किसी जनसुनवाई या सूचना के मनमानी कर रहा है।
अबकी बार आर-पार की लड़ाई
ज्ञापन में यूनियन ने स्पष्ट किया है कि अगर 06 अप्रैल तक कोई राहत नहीं मिली, तो धरना-प्रदर्शन कर टोल संचालन को बाधित किया जाएगा।
चालकों का कहना है कि यह सिर्फ टैक्सी यूनियन की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की लड़ाई है और अब इसे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटाया जाएगा।
ये रहे प्रमुख चेहरे मौजूद
ज्ञापन सौंपने वालों में धर्माराम, रमेश कुमार, कस्तूराराम, वचनाराम, खेताराम, अम्बाराम, नारायण लाल, मांगीलाल और हरीराम सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
जनता का सवाल:
क्या स्थानीय लोगों पर आर्थिक बोझ डालकर टोल वसूली जायज है, या फिर प्रशासन करेगा हस्तक्षेप?
06 अप्रैल अब निर्णायक तारीख बन चुकी है—देखना होगा कि टोल प्रबंधन झुकता है या सड़कों पर संघर्ष तेज होता है।













