भारत माता आश्रम में अखंड भारत दिवस कार्यक्रम सम्पन्न, विभाजन की पीड़ा और अखंडता का संकल्प गूंजा

नोहर। भारत माता आश्रम में मंगलवार सायंकाल महंत योगी रामनाथ अवधूत जी के सानिध्य में अखंड भारत दिवस का आयोजन बड़े ही उत्साह और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ सम्पन्न हुआ। यह अवसर भारत के गौरवशाली इतिहास, विभाजन की पीड़ा और राष्ट्र की एकता के संकल्प का प्रतीक बन गया।
शुभारंभ : दीप प्रज्ज्वलन और आरती
महंत योगी रामनाथ अवधूत जी के सानिध्य में कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। इसके बाद उपस्थित कार्यकर्ताओं और अतिथियों ने एक साथ खड़े होकर सस्वर भारत माता की आरती की।
आरती के समय पूरा आश्रम “भारत माता की जय” और “वंदेमातरम्” के नारों से गूंज उठा।
मुख्य वक्ता प्रमोद डेलू का संदेश
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू ने अपने उद्बोधन में कहा—
“भारत की आज़ादी सैकड़ों वर्षों के सतत संघर्ष और अनगिनत देशभक्त क्रांतिकारियों के बलिदान का परिणाम है। लेकिन दुख इस बात का है कि सत्ता के लालची नेताओं ने भारत माता की दोनों भुजाएँ, देश के विभाजन में पाकिस्तान बनाकर काट दीं।”
उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लगभग 20 लाख हिंदुओं का नरसंहार हुआ और असंख्य माताओं-बहनों के साथ अमानवीय कृत्य हुए। यह इतिहास का ऐसा काला अध्याय है जिसे पीढ़ियों तक याद रखना चाहिए।
इतिहास की झलक : आशीष पारीक का संबोधन
एडवोकेट आशीष पारीक ने 1947 के विभाजन और समय-समय पर भारत के अन्य हिस्सों में हुए अलगाव की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाजन केवल भूगोल का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह लाखों परिवारों, सांस्कृतिक संबंधों और सामाजिक ताने-बाने के टूटने का कारण बना।
देशभक्ति का माहौल
पूरे कार्यक्रम में देशभक्ति गीत, नारे और वंदेमातरम् के स्वर गूंजते रहे। युवा कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प लिया, वहीं वरिष्ठ जनों ने विभाजन के समय की यादें साझा कर युवाओं को जागरूक किया।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम में महंत योगी रामनाथ अवधूत, काशीराम गोदारा, नन्दलाल वर्मा, अभिषेक पारीक, शैलेन्द्र वर्मा, प्रद्युम्न व्यास, सुरेंद्र सीवर, ओम सुथार, विक्रम स्वामी, शैलेन्द्र कसवां, महेश सोनी, अंकित अग्रवाल, विजयपाल स्वामी, दशरथ गौड़, श्रवण रैगर सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अखंड भारत दिवस का महत्व
अखंड भारत दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं है। यह हमें यह याद दिलाता है कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक एकता हजारों वर्षों पुरानी है।
“अखंड भारत” की अवधारणा में न केवल आज का भारत, बल्कि ऐतिहासिक भारत के वे सभी क्षेत्र आते हैं जो एक समय भारतीय संस्कृति, व्यापार और सभ्यता का हिस्सा थे।
1947 का विभाजन : कारण और परिणाम
पृष्ठभूमि — ब्रिटिश शासन के अंतिम वर्षों में स्वतंत्रता आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था। मुस्लिम लीग की अलग राष्ट्र की मांग और अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” नीति ने विभाजन को जन्म दिया।
मुख्य कारण
- धार्मिक आधार पर राजनीति और पाकिस्तान की मांग।
- कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक समझौते की असफलता।
- सत्ता हस्तांतरण में अंग्रेजों की जल्दबाजी।
परिणाम
- लगभग 20 लाख लोगों की मौत।
- करोड़ों का विस्थापन।
- महिलाओं पर बड़े पैमाने पर अत्याचार।
- सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों का टूटना।
अखंड भारत में शामिल ऐतिहासिक क्षेत्र
अखंड भारत की परिकल्पना में निम्नलिखित वर्तमान देश/क्षेत्र आते हैं—
- भारत
- पाकिस्तान
- बांग्लादेश
- अफगानिस्तान
- नेपाल
- भूटान
- श्रीलंका
- म्यांमार
यह केवल एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति, भाषा और इतिहास का प्रतीक है। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे राष्ट्र की अखंडता और एकता के लिए कार्य करेंगे और विभाजन जैसी त्रासदी को कभी दोहराने नहीं देंगे।















