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सुमेरपुर कृषि उपज मंडी की डीएलसी दरों में होगी कमी, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन
पाली जिले की सुमेरपुर कृषि उपज मंडी में भूखंडों की डीएलसी दरें अन्य मंडियों से कहीं अधिक होने के कारण व्यापारी रजिस्ट्री से बचते हुए केवल एग्रीमेंट पर व्यापार कर रहे हैं, जिससे सरकार को लंबे समय से राजस्व नुकसान हो रहा है। इस पर कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अवगत कराया, जिन्होंने दरों में शीघ्र संशोधन का आश्वासन दिया है।

सुमेरपुर कृषि उपज मंडी की डीएलसी दरों में होगी कमी
सुमेरपुर की महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी समिति की डीएलसी दर ₹4,776/वर्ग फीट है, जो 16 प्रमुख मंडियों में सबसे अधिक बताई गई है।
मंडी परिसर बनाम बाहरी बाजार
मंडी परिसर के बाहर जवाई बांध रोड जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों की डीएलसी दर ₹2,393/वर्ग फीट है। यानी मंडी गेट से लगभग 20 फीट बाहर दर लगभग आधी हो जाती है। परिणामस्वरूप:
- व्यापारी रजिस्ट्री कराने की बजाय एग्रीमेंट से काम चलाते हैं।
- पिछले लगभग 40 वर्षों से सरकार को अपेक्षित राजस्व नहीं मिला।
- मंडी के विस्तार और सुविधाओं के उन्नयन पर प्रतिकूल असर पड़ा।
लंबे समय से उठती मांग
सुमेरपुर कृषि उपज मंडी व्यापार संघ और समिति ने डीएलसी दरें घटाने के प्रस्ताव कई बार जिला कलेक्टर, पाली को भेजे हैं। श्री कुमावत ने भी अपने पूर्व विधायक कार्यकाल में भी यह मुद्दा बार-बार विधानसभा में रखा था। अब मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद व्यापारियों को ठोस राहत की उम्मीद है।
- कृषि उपज मंडी परिसर में कृषि से जुड़े अन्य व्यापार भी संचालित करने की अनुमति।
- नवोदित उद्यमियों को प्रोत्साहन हेतु रियायती दरों पर दुकानों का आवंटन।
राजस्व और विकास: दरें घटने पर रजिस्ट्री बढ़ेगी, सरकार को करोड़ों का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है, मंडी में निवेश और रोज़गार के अवसर बनने की संभावना है।







