पारदर्शिता पर सवाल: मीरा-भायंदर महानगरपालिका की महासभा में वीडियो शूटिंग पर रोक क्यों?

मीरा भायंदर महानगरपालिका की महासभा में मोबाइल द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग पर प्रतिबंध लगाए जाने की घटना ने पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, क्योंकि जहां एक ओर सरकारें और स्थानीय प्रशासन पारदर्शी प्रशासन की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों की कार्यवाही को रिकॉर्ड करने से रोकना आम नागरिकों और मीडिया के अधिकारों पर अंकुश जैसा प्रतीत होता है, महासभा जैसी महत्वपूर्ण बैठकों में लिए जाने वाले निर्णय सीधे शहर के विकास और जनता के हितों से जुड़े होते हैं.

ऐसे में यदि कार्यवाही को सार्वजनिक रूप से रिकॉर्ड करने या दिखाने पर पाबंदी लगाई जाती है तो इससे शंकाएं पैदा होना स्वाभाविक है, सवाल यह भी उठता है, कि क्या यह निर्णय व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया या फिर असहज सवालों और वास्तविक स्थिति को सामने आने से रोकने के लिए,क्योंकि लोकतंत्र में पारदर्शिता ही विश्वास की नींव होती है और किसी भी प्रकार की रोक से प्रशासन की मंशा पर बहस तेज होना तय है, अब आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि यह प्रतिबंध किस नियम के तहत लगाया गया है और क्या जनता को उनके ही प्रतिनिधियों की कार्यवाही देखने का अधिकार नहीं है।














