
जेठमल बी. राठौड़, बाली/भायंदर
पूना, 14 अप्रैल 2026।
परम पूजनीय पंजाब केसरी गुरुदेव आचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज के पावन समुदाय के क्रमिक पट्टधर, गच्छाधिपति श्रुतभास्कर आचार्य श्रीमद् विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी महाराज आदि ठाणा का मंगलवार प्रातः पूना नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
इंद्रप्रस्थ से प्रारंभ हुई इस मंगल यात्रा का श्री राजस्थानी जैन श्वेताम्बर संघ (पूर्वी विभाग), सोमवार पेठ, पुणे में श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव के साथ स्वागत किया गया। “जब तक सूरज चाँद रहेगा, वल्लभ तेरा नाम रहेगा” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस मंगल प्रवेश के संक्रांति लाभार्थी मातुश्री भंवरीबाई पारसमल वैद मेहता परिवार (गोडवाड़, वर्तमान पुणे – राज ज्वेलर्स परिवार) रहे। संघ की ओर से गुरुदेव की प्रतिकृति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया, साथ ही पूज्य गच्छाधिपति गुरुदेव को कांबली अर्पण की गई। सभी लाभार्थी परिवारों का सम्मान भी किया गया।

इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने समय की आवश्यकता के अनुरूप सारगर्भित प्रवचन प्रदान करते हुए धर्म, संयम और साधना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। साथ ही सभी आराधकों, तपस्वियों एवं आयोजकों को साधुवाद दिया।
गुरुदेव ने श्री शासन प्रभावक मंदिर, अंबाला (हरियाणा) में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठा महोत्सव के चढ़ावों की प्रथम जाजम का शुभ मुहूर्त भी प्रदान किया।
आगामी कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे:
- 17 से 21 अप्रैल 2026: पंचान्हिका महोत्सव एवं 150 वर्षीय तपस्वियों का सामूहिक पारणा महोत्सव (सोमवार पेठ, पुणे)
- 23 अप्रैल से 2 मई 2026: दशान्हिका अंजनशलाका महोत्सव
सभी श्रद्धालुओं एवं सकल श्री संघ को इन आयोजनों में सहभागी बनने हेतु आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान हर्षित बेद, सुनील पारेख एवं केवलचंद बेलापुर ने भजनों की प्रस्तुति दी, जबकि विजय कुमार कोचर (बीकानेर) ने संक्रांति भजन सुनाया।
मुनि श्री अक्षयरत्न विजयजी द्वारा श्री माणिभद्र वीर स्तोत्र तथा मुनि श्री महाभद्र विजयजी द्वारा संक्रांति स्तोत्र का भावपूर्ण श्रवण कराया गया।

गुरुदेव ने संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ सौर मासानुसार वैशाख माह का शुभारंभ होता है।
अंत में श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ वातावरण को गुंजायमान कर दिया—
“बोलो श्री विजयानंद सूरी महाराज की जय”
“बोलो श्री विजय वल्लभ सूरी महाराज की जय”











