सिरोही अंबेडकर प्रतिमा प्रकरण: जांच के निष्कर्ष ने बदला पूरा एंगल, 48 घंटे में आरोपी गिरफ्तार
बाबा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की घटना के बाद जहां क्षेत्र में शुरुआती स्तर पर तनाव और आशंका का माहौल बनने लगा था, वहीं पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आते ही पूरा मामला एक अलग दिशा में चला गया। जांच ने स्पष्ट कर दिया कि यह घटना किसी सामाजिक टकराव या सुनियोजित साजिश का हिस्सा नहीं, बल्कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया व्यक्तिगत कृत्य था। इस खुलासे के साथ ही स्थिति में तेजी से बदलाव आया और माहौल शांत होने लगा।

- सिरोही।
घटना के बाद बना तनावपूर्ण माहौल
12 अप्रैल को थाना सिरोही सदर क्षेत्र में स्थित अंबेडकर प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई।
सुबह जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
ऐसी संवेदनशील घटनाओं में अक्सर मामला सामाजिक टकराव का रूप ले सकता है, और शुरुआती माहौल भी उसी दिशा में जाता दिखाई दे रहा था।
जांच ने स्पष्ट किया वास्तविक कारण
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय जानकारी और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया।
कुछ ही समय में पुलिस उस निष्कर्ष तक पहुंची, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी—
यह घटना किसी समूह या समुदाय से जुड़ी नहीं थी, बल्कि एक व्यक्ति के निजी कारणों का परिणाम थी।
बाबा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के मामले में सिरोही पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। 12 अप्रैल को परिवादी छगनलाल पुत्र अचलाजी मेघवाल, अध्यक्ष मेघवाल समाज विकास संस्थान, जावाल ने थाना सिरोही सदर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 अप्रैल की रात अज्ञात व्यक्ति ने गांव में स्थित प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया।
जिला पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोर सिंह चौहान, वृत्ताधिकारी मुकेश चौधरी एवं थानाधिकारी घनश्याम सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय सूचना और पूछताछ के आधार पर जांच करते हुए आरोपी बालूराम उर्फ डाकू पुत्र मनाराम, जाति मेघवाल, उम्र 39 वर्ष, पेशा मजदूरी, निवासी थाना सिरोही सदर को गिरफ्तार किया। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह घटना किसी सामाजिक टकराव या साजिश का हिस्सा नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत कृत्य थी, जिसके सामने आते ही पूरे मामले का एंगल बदल गया और क्षेत्र में बना तनाव शांत हो गया। इस कार्रवाई में पुलिस टीम के सदस्य कैलाशदान, कमल सिंह, नारायणलाल, भवानी सिंह, सरत सिंह, सीताराम, बजराराम और प्रकाशराम की विशेष भूमिका रही।













