बेसहारा गोवंश की बदहाली, हाईवे बना मौत का रास्ता

गुरलां (भीलवाड़ा), सत्यनारायण सेन गुरला
भीलवाड़ा जिले की गुरलां ग्राम पंचायत में निराश्रित गोवंश की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के बीच बेसहारा गाय और नंदी भूख, प्यास और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
कचरे के ढेरों में भोजन की तलाश में ये पशु प्लास्टिक और पॉलिथीन खाने को मजबूर हैं, जिससे कई मामलों में उनकी दर्दनाक मौत भी हो चुकी है।
🔴 प्रमुख समस्याएं
1. गौशाला की कमी
गुरलां क्षेत्र में निराश्रित गोवंश के लिए कोई सक्रिय सरकारी गौशाला या नंदीशाला उपलब्ध नहीं है, जिससे पशु खुले में भटक रहे हैं।
2. हाईवे पर लगातार हादसे
राष्ट्रीय राजमार्ग पर पशुओं की आवाजाही के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इससे न सिर्फ पशुओं की जान जा रही है, बल्कि वाहन चालक भी खतरे में हैं।

3. प्लास्टिक सेवन से मौतें
भोजन की कमी के चलते गोवंश कचरे से प्लास्टिक खा रहे हैं, जो उनके पेट में जमा होकर गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन रहा है।
4. गौचर भूमि पर अतिक्रमण
ग्रामीणों के अनुसार गौचर भूमि का न तो सीमांकन हुआ है और न ही तारबंदी, जिससे उस पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है और पशुओं को सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और गौ रक्षकों ने मांग की है कि निराश्रित गोवंश को तुरंत नजदीकी गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही हाईवे और गांवों में घूम रहे पशुओं को सुरक्षित रूप से हटाने के लिए पंचायत प्रशासन, सचिव और हाईवे प्रबंधन टीम को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
आक्रोश और चेतावनी
गौ रक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।













